नई दिल्ली. Triple Talaq Bill Divides NDA: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोकसभा चुनाव 2019 में ऐतिहासिक जीत हासिल करने वाले एनडीए में दरार दिखने लगी है. दरअसल नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड ने सरकार की तरफ से लोकसभा में पेश किए गए तीन तलाक बिल का विरोध किया है. अपने इस कदम का बचाव करते हुए जेडीयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने कहा कि एनडीए के भीतर कॉमन एजेंडा सेट करने के लिए एक कोआर्डिनेशन कमेटी बनाने की आवश्यक्ता है.

जेडीयू प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा कि यह अजीब है कि एनडीए में होने के बावजूद हम यूनिफॉर्म सिविल कोड और तीन तलाक जैसे मुद्दों पर सरकार का विरोध करते हैं. यह दुखद है कि इन सभी मुद्दों पर आम राय बनाने के लिए एनडीए के भीतर कोई मंच उपलब्ध नहीं है. केसी त्यागी ने आगे कहा कि एनडीए में न ही कॉमन मिनिमम प्रोग्राम है न ही कोई कोऑर्डिनेशन कमेटी.

केसी त्यागी ने आगे कहा कि एनडीए ने अभी तक यूनिफॉर्म सिविल कोड जैसे मुद्दों पर कोई रणनीति तय नहीं की है, इसलिए हर पार्टी अपनी बात कह रही है. हम धारा 370 का समर्थन करते हैं क्योंकि हमारा मानना है कि इससे छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए. राम मंदिर के मुद्दे पर तो प्रधानमंत्री ने भी कहा है कि हमें कोर्ट के नतीजे का इंतजार करना चाहिए लेकिन कुछ बीजेपी नेता कहते हैं कि वह कोर्ट के निर्णय का सम्मान नहीं करते हैं. बीजेपी नेताओं की यह बात हमें अजीब स्थिति में डाल देती है.

जेडीयू नेता ने आगे कहा कि एनडीए में शामिल दल अलग-अलग विचारधारा को मानने वाले हैं लेकिन हम सभी अच्छी सरकार चलाने के लिए प्रतिबद्ध है. केसी त्यागी ने कहा कि बहुत अच्छा होगा अगर एनडीए के भीतर कोआर्डिनेशन कमेटी का गठन हो जाता है. कमेटी के गठित होने से एनडीए में शामिल दल किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर आम राय बना पाएंगे.

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में एनडीए के भीतर पहली दरार तब देखने को मिली जब सरकार की तरफ से लोकसभा में तीन तलाक बिल पेश किया गया. हालांकि बीजेपी को अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल है ऐसे में उसे लोकसभा में किसी बिल को पास कराने के लिए एनडीए के अपने घटक दलों की आवश्यक्ता नहीं है, लेकिन राज्यसभा जहां बीजेपी को बहुमत हासिल नहीं है वहां किसी बिल को पास कराने के लिए वह अपने सहयोगी दलों पर निर्भर है. अब जब जेडीयू ने तीन तलाक बिल के मुद्दे पर सरकार का साथ न देने का फैसला किया है तो इस बिल के राज्यसभा में पास होने की उम्मीदें काफी कम हो गई है.

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