नई दिल्ली. देश कोरोना महामारी की त्रासदी में डूबा हुआ है। लचर स्वास्थ्य व्यवस्था से हज़ारों लोग जान गवां चुके हैं। सरकार खुद तीसरी लहर का अंदेशा जाहिर कर चुकी है। लेकिन इसपर बात करने के बजाय देश की दो बड़ी पार्टियां बीजेपी और कांग्रेस टूलकिट में उलझी हुई हैं। टूलकिट विवाद और जोर पकड़ता दिख रहा है। ये हंगामा तब और बढ़ गया जब ट्विटर ने बीजेपी के कई नेताओं के उन ट्वीट को ‘मैनुपुलेटेड’ करार दे दिया जो कांग्रेस को टूलकिट इस्तेमाल करने के आरोप लगा रहे थे।

ट्वीट के मैनुपुलेटेड करार दिए जाने के बाद बीजेपी ने ट्विटर के खिलाफ सख्त आपत्ति जताई है। केंद्र सरकार ने ट्विटर से कहा है कि वो मैनिपुलेटेड मीडिया का टैग हटा लें क्योंकि इस मामले की जांच चल रही है. सरकार ने कहा कि ये ट्विटर को तय करने का हक नहीं कि क्या सही या फिर क्या गलत. बल्कि ये एजेंसियो की जांच से ही पता चलेगा कि ये कंटेट सही है या गलत।

मंत्रालय ने आरोप लगाया है कि कंटेट को इस तरह से पेश करना ट्विटर के मध्यस्थ और न्यूट्रल होने की भूमिका पर ही सवाल खडे़ कर रहा है।

कांग्रेस का हमला

ट्विटर की ओर से इस टैग के बाद कांग्रेस कहां शांत रहने वाली थी। कांग्रेस ने तुरन्त बीजेपी पर हमला बोला। टूलकिट विवाद पर कांग्रेस के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने कहा कि बीजेपी ने फेक कंटेंट तैयार किया. उनके झांसे में आने की बात कही गई है. उनका पर्दाफाश हो गया है. हम लोगों की अदालत से एक्शन पर विश्वास करते हैं. हम बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष (जेपी नड्डा) से कार्रवाई के लिए कह सकते हैं, लेकिन वह इसमें खुद शामिल हैं।

इन नेताओं के ट्वीट को मिला टैग

ट्विटर ने बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा, राज्यसभा सांसद विनय सहस्रबुद्धे, बीजेपी की नेशनल मीडिया इंचार्ज प्रीति गांधी, आंध्रप्रदेश को-इंचार्ज सुनील देवधर, बीजेपी की मीडिया पैनलिस्ट चारू प्रज्ञा और दिल्ली बीजेपी के जरनल सेक्रेटरी कुलजीत सिंह चहल इनके अकाउंट को मैनुपुलेटेड का टैग दिया है।

क्या है मामला

दरअसल, कुछ दिन पहले भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर ये आरोप लगाया था कि कांग्रेस एक टूलकिट के जरिए पीएम मोदी की छवि को खराब कर रही है। अब इसी ट्वीट को ट्विटर ने तोड़ मरोड़ कर पेश करने वाला यानी ‘मैनुपुलेटेड’ करार दिया है।

मालूम हो कि ट्विटर ने इस तरह की कई चेतावनी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी दी थी, जब कथित तौर पर ट्रंप ने अपने समर्थकों को कैपिटल बिल्डिंग (संसद परिसर) की घेराबंदी के लिए उकसाया था, जिसके बाद बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी।

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