नई दिल्ली.Ayodhya Land Dispute Case Timeline: अयोध्या विवादित भूमि मामले में 25 जुलाई से हर रोज सुनवाई होगी या नहीं ये सुप्रीम कोर्ट आज गुरुवार यानी 18 जुलाई 2019 को तय करेगा. दरअसल कई सौ सालों से चले आ रहे इस विवादित मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाई गई मध्यस्थता समिति अपनी प्रगति रिपोर्ट गुरूवार को आज यानी गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ के सामने प्रस्तुत करेगी. अगर जजों की बेंच मध्यस्थता समिति की प्रगति रिपोर्ट के से संतुष्ट नहीं हुई तो वह 25 जुलाई से रोजाना सुनवाई का ऐलान कर सकती है. इस पूरे मामले में सभी पक्षों में आपसी रजामंदी से बात बनती नजर आ रही है या नहीं ये बात मध्यस्थता समिति सुप्रीम कोर्ट को बताएगी.

अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विवादित ढांचे को 6 दिसंबर 1992 को गिरा दिया गया था, हालांकि विवादित स्थल पर आजतक राम मंदिर का निर्माण नहीं हो पाया है और अब कई हिंदू संगठन राम मंदिर निर्माण की मांग कर रहे हैं और दूसरा पक्ष इसका विरोध कर रहा है. बता दें कि अयोध्या विवादित भूमि मामला आज का नहीं बल्कि सदियों पुराना है. आइए जानते हैं कि अयोध्या विवादित भूमि मामले में कब कब, क्या क्या हुआ है-

साल 1528-29- मुगल बादशाह बाबर के आदेश पर उसके सेनापति मीर बाकी ने एक मस्जिद बनवाई, जिसे बाबरी मस्जिद नाम दिया गया. हिंदू मान्यताओं के अनुसार इसी जगह भगवान राम का जन्म हुआ था और हिंदू संगठनों का आरोप है कि राम मंदिर को तोड़कर बाबर ने बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया था. हालांकि कई शोधकर्ताओं का दावा है कि असल विवाद की शुरुआत 18वीं सदी में हुई.

साल 1853- साल 1853 में मंदिर मस्जिद का विवाद फिर सामने आया, जिसमें हिंदुओं ने आरोप लगाया कि मंदिरों को तोड़कर मुस्लिमों ने अपना धार्मिक स्थल बनवाया. इस बात को लेकर पूर्व में पहली बार हिंसा के प्रमाण मिलते हैं.

साल 1859- हिंदू मुस्लिमों के बीच उपजे इस विवाद में अंग्रेजी हुकूमत ने मध्यस्थता करते हुए विवादित स्थल का बंटवारा कर दिया और तारों की एक बाड़ खड़ी करा दी ताकि अलग-अलग जगहों पर हिंदू मुस्लिमों अपनी-अपनी प्रार्थना कर सकें.

साल 1885- हिंदू मुस्लिमों के बीच उपजे इस विवाद ने इतना गंभीर रूप ले लिया कि ये मामला अदालत पहुंच गया. हिंदू साधु महंत रघुबर दास ने फैजाबाद कोर्ट में बाबरी मस्जिद परिसर में राम मंदिर बनवाने के लिए इजाजत मांगी, हालांकि अदालत ने ये याचिका खारिज कर दी. इसके बाद ये मामला और गहराता गया, जिसके बाद इस मामले जुड़ी घटनाओं का सिलसिलेवार जिक्र मिलता है.

साल 1949- साल 1949 में हिंदुओं ने मस्जिद में कथित तौर पर भगवान राम की मूर्ति स्थापित कर दी. तब से हिंजू ही पूजा करने लगे और मुस्लिमों ने मस्जिद में नमाज पढ़नी बंद कर दी.

साल 1950- मुस्लिमों द्वारा नमाज पढ़ना बंद करने के बाद फैजाबाद अदालत में एक याचिका दायर कर गोपाल सिंह विराशद ने भगवान राम की पूजा की इजाजत मांगी.

साल 1950- इस साल महंत रामचंद्र दास ने मस्जिद में हिंदुओं द्वारा पूजा जारी रखने के लिए याचिका लगाई. इसी दौरान मस्जिद को ढांचा के रूप में संबोधित किया गया.

साल 1959- इस साल निर्मोही अखाड़ा अयोध्या विवादित भूमि के हस्तांतरण के लिए मुकदमा दर्ज कराया.

साल 1961- निर्मोही अखाड़ा द्वारा मुकदमा दर्ज कराने के बाद तस्वीर थोड़ी बदली और उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बाबरी मस्जिद पर मालिकाना हक के लिए मुकदमा दर्ज करा दिया.

साल 1984- इस साल विश्व हिंदू परिषद ने बाबरी मस्जिद का ताला खोलने और इस जगह पर मंदिर बनवाने के लिए देश में अभियान शुरू किया और इसके लिए बाकायदा एक समिति का गठन किया.

साल 1986- इस साल फरवरी महीने में एक स्थानीय अदालत ने विवादित स्थल पर हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत दे दी और ताले दोबारा खोले गए. इससे नाराज मुस्लिम वर्ग ने अदालत के फैसले के विरोध में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी बनाई.

साल 1989- इस साल जून महीने में भारतीय जनता पार्टी ने औपचारिक रूप से विश्व हिंदू परिषद की मांगों का समर्थन किया.

साल 1989- इसी साल नवंबर महीने में लोकसभा चुनाव के कुछ महीनों पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने बाबरी मस्जिद के नजदीक मंदिर के शिलान्यास की इजाजत दे दी.

साल 1990- इस साल 25 सितंबर को भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेस के अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली ताकि हिंदुओं को उनसे जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दों से अवगत कराया जा सके. इस यात्रा के फलस्वरूप हजारों की संख्या में कारसेवक अयोध्या में इक्टठा हुए. इस यात्रा के बाद संप्रदायिक दंगे भी हुए.

साल 1990- इसी साल नवंबर में बिहार से लाल कृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद बीजेपी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री वी पी सिंह की सरकार समर्थन वापस ले लिया.

साल 1992- इसी साल 6 दिसंबर के दिन को ऐतिहासिक दिन के तौर पर याद रखा जाता है. इस दिन हजारों की संख्या में कार सेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी मस्जिद ढहा दी और अस्थायी राम मंदिर का निर्माण कर दिया गया. इस घटना के बाद देशभर में सांप्रदायिक दंगे होने लगे, जिसमें लगभग 2000 लोगों के मारे जाने का सरकारी रिकॉर्ड मौजूद है.

साल 1992- 16 दिसंबर की तारीख को मस्जिद में हुई तोड़ फोड़ की जांच के लिए लिब्राहन आयोग का गठन किया गया. जज एमएस लिब्रहान के नेतृत्व में पूरे मामले की जांच शुरू की गई.

साल 1997- इस साल सितंबर में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की सुनवाई कर रही एक विशेष अदालत ने कुल 49 लोगों को दोषी करार दिया. अदालत द्वारा दोषी करार दिए गए लोगों में बीजेपी के कई नेता शामिल थे.

साल 2001- इस साल विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिेए मार्च 2002 को डेडलाइन के तौर पर मार्क किया.

साल 2002- इस साल अप्रैल में हाईकोर्ट के तीन जजों की पीठ ने अयोध्या के विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर सुनवाई शुरू की.

साल 2003- इस साल मार्च अगस्त के महीने में इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अयोध्या में खुदाई की. पुरातत्वविदों ने कहा कि मस्जिद के नीचे मंदिर के अवशेष के प्रमाण मिले हैं. हालांकि इसको लेकर लोगों के अलग-अलग मत थे.

साल 2009- इस साल जुलाई में लिब्रहान आयोग ने अपने गठन के लगभग डेढ़ दशक बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी जांज रिपोर्ट सौंपी.

साल 2010- इस साल 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इलाबाद हाईकोर्ट को विवादित मामले में फैसला देने से रोकने वाली याचिका को खारिज कर दिया.

साल 2010- इस साल 30 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांट दिया. इसमें एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और तीसरा निर्मोही अखाड़ा को दे दिया गया.

साल 2011- इस साल 9 मई को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी.

साल 2016- इस साल 26 फरवरी में सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर विवादित भूमि पर राम मंदिर निर्माण बनाने की मांग की थी.

साल 2017- इस साल 21 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर ने इस विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने की सलाह दी.

साल 2017- इसी साल 19 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में बीजेपी और आरएसएस के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया.

साल 2017- इसी साल 1 दिसंबर को लगभग 32 नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के साल 2010 के फैसले को चुनौती दी.

साल 2018- इस साल 8 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने सिविल अपील पर सुनवाई शुरू कर दी.

साल 2018- इसी साल 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.

साल 2018- इसी साल 29 जुलाई सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जल्द सुनाई पर इनकार करते हुए केस जनवरी 2019 तक के लिए टाल दिया.

साल 2018- इसी साल 12 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई शुरू करने की अखिल भारतीय हिंदू महासभा की मांग को खारिज कर दिया.

साल 2018- इसी साल 24 दिसंबर को सुनवाई करते सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 4 जनवरी 2019 तय कर दी.

साल 2019- सुप्रीम कोर्ट ने 8 जनवरी 2019 को चीफ जस्टिस की रंजन की अध्यक्षता में पांच जजों की संवैधानिक पीठ का गठन किया है. पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एस ए बोबडे, एन वी रमन्ना, यू यू ललित और डी वाई चंद्रचूड़ को भी शामिल किया.

साल 2019- 10 जनवरी 2019 को पीठ में शामिल जस्टिस यू यू ललित ने खुद को संवैधानिक पीठ से अलग कर लिया, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए नई बेंच का गठन करने के लिए 29 जनवरी की तारीख तय की.

साल 2019- 25 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में इस मामले की सुनवाई के लिए संवैधानिक पीठ का गठन किया. चीफ जस्टिंस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली इस पीठ में जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्चिस एस ए नजीर को शामिल किया गया.

साल 2019- 27 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को होने वाली सुनवाई को जस्टिस एस ए बोबडे की अनुपस्थिति के चलते टाल दिया.

साल 2019- 29 जनवरी को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से विवादित स्थल की आसपास की 67 एकड़ अधिग्रहित जमीन को मूल मालिको को वापस करने की अनुमति मांगी.

साल 2019- 20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की तारीख 26 फरवरी तय की.

साल 2019- 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षकारों से मध्यस्थता के जरिए इस मामले को हल करने की बात कही.

साल 2019- 8 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट के जज एफ एम आई कलीफुल्ला की अध्यक्षता वाले पैनल को मध्यस्थता के जरिए इस विवाद को सुलाझाने को कहा.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मध्यस्थता कमेटी को शुरुआत में मामले को हल करने के लिए 2 महीनों का वक्त दिया था जिसे बाद में बढ़कारल 13 हफ्ते कर दिया गया. इसी बीच कोर्ट के गर्मी की छुट्टी के बाद खुलते ही याचिकाकर्ता गोपाल सिंह विराशद ने कोर्ट से कहा कि समिति के नाम पर अयोध्या भूमि विवाद के सुलझने के आसार बेहद कम हैं क्योंकि इसमें तो सिर्फ समय बर्बाद हो रहा है. इसलिए कोर्ट कमेटी को खत्म करके स्वंय सुनवाई कर इस मामले का निपटारा करें.

Supreme Court Ayodhya Case Final Hearing: अयोध्या राम मंदिर जन्मभूमि बाबरी मस्जिद जमीन विवाद में मध्यस्थता से नहीं बनी बात तो सुप्रीम कोर्ट में 25 जुलाई से अंतिम बहस की रोजाना सुनवाई संभव !

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