Tuesday, December 6, 2022

गुजरात के इन गांवों ने किया चुनाव का बहिष्कार, जानिए अहम वजह

गांधीनगर। गुजरात विधानभा चुनावों के लेकर सभी राजनीतिक दल गुजरात के एक-एक गली कूचे में लोगों से सम्पर्क कर रहे हैं, लेकिन गुजरात के इस गांव ने चुनाव का बहिष्कार करते हुए सभी राजनीतिक दलों की एंट्री गांव में बंद कर दी है। अहम कारण के चलते चेहवाना गांव के लोग किसी भी राजनीतिक दल को प्रचार एवं प्रसार के लिए गांव के भीतर एंट्री देने को तैयार नहीं है और साथ ही चुनाव का बहिष्कार करने का भी मन बना रहे हैं।

क्या हुआ इस गांव में ?

गुजरात के अरावली जिले का चेहवाना मुवाडा गांव एक ऐसे गांव के रूप में सामने आया है जिन्होने चुनाव प्रचार के लिए किसी भी राजनीतिक दल का प्रवेश वर्जित कर दिया है। गांव वालों का कहना है कि, इस गांव के लिए सरकार ने कोई भी कदम नहीं उठाया भले ही कागज़ों मे गुजरात को विकास के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जाता हो लेकिन इस गांव के लोग विकास के नाम पर कुछ भी न जानते हैं और न ही उन्होने कभी विकास देखा है।

गांव की क्या है समस्या?

200 लोगों की आबादी वाले इस छोटे से गांव में अब तक कोई पक्की सड़क नहीं बनी है। जिसके चलते गांव वालों ने गांव क बाहर ही एक बैनर टांग दिया है जिसमें लिखा है नो वोट नो रोड इस गांव में नही तो कोई प्राइमरी स्कूल है और मुख्य सड़क से गांव तक अंदर आने के लिए तीन किलोमीटर की गड्ढेदार कच्ची सड़क है जो बारिश के बाद और भी ज़्यादा तकलीफदेह हो जाती है।
यदि गांव में किसी प्रकार की घटना घट जाती है या फिर कोई बीमार हो जाता है तो वहां एंबुलेंस अंदर नही आ पाती बल्कि मरीज़ को चारपाई में लिटा कर मुख्य सड़क तक ले जाया जाता है। गांव के लोगों का कहना है कि, बारिश के बाद तो शहर और गांव के बीच लम्बा फासला पैदा हो जाता है । यहाँ से निकलना बड़ा मुश्किल होता है।
इसी तरह के एक और गांव ने भी बहिष्कार की बात की है सड़क को लेकर नहीं बल्कि रेत माफिया पर लगाम लगाने को लेकर। नर्माद जिले के ओरी गांव के लोगों का कहना है कि, अवैध रेत उत्खनन और उसकी ढुलाई की बजह से इलाके के खेतों में रेत फैल जाता है जिससे केवल फसलों के चौपट होने का ही खतरा नहीं बल्कि ट्रकों से होने वाली रेत की ढुलाई की वजह से उनके घरों में भी रेत धूल साथ पहुंच जाती है।

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