नई दिल्लीः पिछले दिनों राहुल गांधी ने देश से बाहर जाकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की तुलना अरब देशों में मुस्लिमों के संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड से कर दी, उसको लेकर जितने कट्टर हिंदू नाराज हुए, उतने ही कट्टर मुस्लिम. संघ परिवार को तो खैर नाराज होना ही था, कई लोगों ने सवाल उठाए कि अभी राहुल गांधी ना संघ को बेहतर समझते हैं और ना ही मुस्लिम ब्रदरहुड को. लेकिन आपको ये जानकर हैरत होगी कि इन दोनों ही संगठनों में आपस में कितना भी अंतर क्यों ना हो, इन संगठनों के दोनों चीफ की जिंदगी की एक अनोखी बात कॉमन है, यानी दोनों में एक जैसी है.

संघ अपने चीफ को सरसंघचालक सम्बोधित करता है, जबकि बाहर की दुनियां मुस्लिम ब्रदरहुड के चीफ को सुप्रीम गाइड कहती है. डा. मोहन भागवत आरएसएस के 2009 से सरसंघचालक हैं, जबकि इजिप्ट (मिस्र) के रहने वाले मोहम्मद बदी 2010 से मुस्लिम ब्रदरहुड की कमान संभाले हुए हैं. मोहन भागवत शायद ही कभी जेल गए हों, हाल ही में थोड़े से नोटिस पर आपात स्थिति में अपने स्वंयसेवकों की सेना तैयार करने के विवाद पर उनके खिलाफ मुजफ्फरपुर (बिहार) के एक वकील ने केस डाल दिया था.

तो मोहम्मद बदी को 12 अगस्त को कैरो की एक अदालत ने दंगा भड़काने के जुर्म में उम्र कैद की सजा सुनाई है, इससे पहले पिछले तीन सालों के अंदर बदी को अलग-अलग अदालतें 2 बार फांसी और दो बार ही उम्र कैद की सजा सुना चुकी हैं. मुस्लिम ब्रदरहुड कई अरब और मुस्लिम देशों में काम करने वाला संगठन हैं और कई बार अलग अलग देशों में बैन भी हो चुका है. यहां तक मोहम्मद बदी के बेटे की 2013 में कैरो में हुए एक दंगे में हत्या भी कर दी गई थी, बदी के तीन बेटियां भी हैं. जबकि मोहन भागवत ने प्रचारक के तौर पर संघ ज्वॉइन करने के बाद शादी नहीं की है.

फिर भी मोहम्मद बदी और डा. मोहन भागवत के बीच एक अनोखी समानता भी है, जानने के लिए देखिए विष्णु शर्मा के साथ ये वीडियो स्टोरी—

देश और दुनिया की ताजातरीन खबरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक,गूगल प्लस, ट्विटर पर और डाउनलोड करें Inkhabar Android Hindi News App