Tuesday, December 6, 2022

Gehlot vs Pilot: क्या राजस्थान के राजनीतिक बवंडर में कमल खिलने वाला है?

जयपुर। राजस्थान में कांग्रेसी राजनीति में आई सुनामी थमने का नाम नहीं ले रही है, जब भी गहलोत और पायलट का विवाद होता है तब-तब पंजाब और कैप्टन अमरिंदर सिंह भी याद आ जाते हैं। क्या इस बवंडर में झाड़ू फिरेगी या कमल खिलेगा? मौजूदा विवाद भविष्य की दस्तक दे रहा है। यह विवाद आत्मसम्मान को लेकर है या फिर पार्टी की मज़बूती को लेकर यह फैसला तो आगामी राजस्थान विधानसभा चुनावों में ही होगा।

गहलोत का अनुभव किस काम का?

जब अशोक गहलोत की बात आती है तो राजनीतिक विशेषज्ञ उन्हे राजनीति का जादूगर भी कहते हैं लेकिन मौजूदा समय मे गहलोत की बयानबाजी एवं क्रियाकलाप इस तरह के हैं कि, राजनीतिक धुरंधरों के कथन झूठे साबित होते दिखाई दे रहे हैं। एक बड़े नेता के तौर पर गहलोत का रवैया माफी के लायक नहीं है, जिस तरह उन्होने सचिन पायलट को गद्दार कह कर कांग्रेस में फिर से उथल-पुथल मचा दी है इससे साबित हो जाता है की महत्वाकांक्षाओं के अलावा गहलोत के समीप और कुछ भी नहीं है। मौजूदा समय मे कांग्रेस सम्पूर्ण रूप से दो ही राज्यों की सत्ता पर आसीन है। जहाँ कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को पार्टी की मजबूती को प्राथमिकता देनी चाहिए वहीं गहलोत की बेबाक बयानबाजी राजस्थान की धरती में कमल खिलाने को मजबूर करती दिखाई दे रही है। गहलोत के शब्दों से अमरिंदर सिंह वाली बग़ावत दिखाई देनी लगी है या तो हम नहीं तो कोई नहीं।

पायलट ने अपनाया शांति का रास्ता

सचिन पायलट का बागी हो जाना विधायको को लेकर पार्टी छोड़ देना माफी के काबिल नहीं था। लेकिन शर्मिंदगी के साथ पायलट की वापसी ने यह साबित कर दिया है कि, पायलट के लिए पद से महत्वपूर्ण पार्टी की मज़बूती है, यदि आने वाले समय मे कांग्रेस के द्वारा राजस्थान के नेतृत्व में किसी भी प्रकार का बदलाव किया जाता है तो गहलोत को उसे सहर्ष स्वीकार कर लेना चाहिए।

बड़े नेता भी हैं नाराज़

गहलोत के द्वारा सचिन पायलट को गद्दार कहने पर कांग्रेस के बड़े नेताओं में भी नराज़गी है। गहलोत के इस बयान पर कांग्रेसी सांसद जयराम रमेश ने भी निंदा की है, और पार्टी को मजूबती प्रदान करने की सलाह भी दी है। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने गहलोत के बयान को पायलट के खिलाफ ही नहीं बल्कि समस्त कांग्रेस पार्टी के खिलाफ माना है साथ ही गहलोत को इस्तीफा देने की सलाह भी दी है। साथ ही राजस्थान के पूर्व इंचार्ज अजय माकन भी लगातार गहलोत के पक्ष को बागी कह रहे हैं।

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