नई दिल्ली. Ayodhya Land Dispute Case SC Hearing Day 8 Written Updates: अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ में आज आठवें दिन की सुनवाई शुरू हुई. रामलला विराजमान की तरफ से वरिष्ठ वकील सी एस वैद्यनाथन ने बहस की शुरुआत की गई. सीएस वैद्यनाथन ने पुरातत्व विभाग की खुदाई में मिले सबूत को कोर्ट के समक्ष रखा. सबूतों में कहा गया कि मस्जिद से पहले उस जगह पर मंदिर का अस्तित्व था. पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जमीन के नीचे से मंदिर कर स्ट्रक्चर मिले हैं. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी अपने फ़ैसले में पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट पर भरोसा किया है.

रामलला के वकील सी एस वैद्यनाथन कहा कि मुस्लिम पक्ष की तरफ से शुरुआत में कहा गया था कि जमीन के नीचे कुछ नहीं है, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि जमीन के अंदर जो स्ट्रक्चर मिला है वो इस्लामिक स्ट्रक्चर है. रामलला की तरफ से उदाहरण देते हुए कहा गया कि आज के दौर में लोग फ्लाइट लेकर सुबह सबरीमाला के दर्शन के लिए जाते हैं और शाम को लौट आते हैं, लेकिन राम जन्मभूमि को लेकर श्रद्धालु कई सदियों से दर्शन के लिए जाते हैं, जबकि उस समय नदी के ऊपर कोई ब्रिज भी नहीं था.

रामलला पक्ष के वकील वैद्यानाथन ने कहा
-1114 AD से 1155 AD तक 12 वीं शताब्दी में साकेत मंडला का राजा गोविंदा चंद्रा था.
– उस वक्त अयोध्या उसकी राजधानी थी.
– यहां विष्णु हरि का बहुत बडा मंदिर था.
– पुरातत्वविद्दों ने इसकी पुष्टि भी कि है.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा क्या इस शिलालेख को भी लेकर चैलेंज किया गया है?

वैद्यनाथन ने कहा- स्लैब पर लिखे गए कंटेंट की ट्रांसलेशन या इस शिलालेख की प्रमाणिकता को चेलेंज नहीं किया गया है, बल्कि इस सवाल इस पर उठाया गया है कि ये स्लैब विवादित ज़मीन से मिला है या नहीं. वैद्यनाथन ने 1950 में ली गयी कुछ तस्वीरों को कोर्ट के सामने पेश किया गया है.

रामलला के वकील एस वैद्यनाथन ने 12वीं सदी के शिलालेख का हवाला देते हुए कहा कि पत्थर की जिस पट्टी पर संस्कृत का ये लेख लिखा है, उसे विवादित ढांचा विध्वंस के समय एक पत्रकार ने गिरते हुए देखा था. इसमें साकेत के राजा गोविंद चंद्र का नाम है. साथ ही लिखा है कि ये विष्णु मंदिर में लगी थी. पत्थर कि वैधता और सही होने पर कोई सवाल नहीं है. पत्थर में लिखे संस्कृत अक्षरों का अनुवाद है शिखर श्रेणी कला विष्णु हरी मंदिर है जिसका उल्लेख ऐतिहासिक किताब में भी है.

अयोध्या मामला- 115 सेमी लंबाई और 55 सेमी चौड़ा शिलालेख तीन चार सप्ताह राम कथा कुंज में रखा रहा. यह मस्जिद ढहने को बाद मिला, इस पर किसी पक्ष कार कि ओर से आपत्ति नहीं जताई गई है.

वैद्यनाथन: विवादित ढांचा ढहाने के समय की पांचजन्य के रिपोर्टर की रिपोर्ताज कोर्ट के सामने बयान कर रहे हैं.
– ढहाने के दौरान मैंने शिलाएं गिरती हुई देखीं थीं तब कुछ पुलिस वाले उन पत्थरों को उठा कर रामकथा कुंज ले गए.
-ये शिलाएं 4 फुट x2 फुट आकार वाली थीं.
– वो शिलालेख राज्य पुरातत्व विभाग के अभिरक्षा (कस्टडी) में हैं.

वैद्यनाथन: खुदाई से मिले अवशेषों की वैज्ञानिक पड़ताल के बाद ASI की रिपोर्ट, मौके से मिले सबूत से कोई शंका या विवाद की गुंजाइश नहीं रह जाती.
– ये सब 11 वीं सदी के दौरान निर्मित हैं.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा कि क्या से सब ASI के द्वारा इकट्ठा किया गया था?

इस पर वैद्यनाथन ने कहा कि ये ASI रिपोर्ट में नहीं था, ASI काफी बाद में आई थी. सीएस वैद्यनाथन ने ASI रिपोर्ट का हवाला देते हुए मगरमच्छ, कछुओं का भी जिक्र किया और कहा कि इनका मुस्लिम कल्चर से मतलब नहीं था.

वैद्यनाथन ने इसके बाद ट्रायल के गवाहों के बयान पर बहस शुरू की.

तीर्थपुरोहित रामनाथ की गवाही.
– अयोध्या तीर्थ में पुण्यकाल और उत्सवों पर होने वाली भीड़ का ज़िक्र.
– हनुमतद्वार, राम चबूतरा, सीता रसोई और मुख्य गुम्बद वाली इमारत का वर्णन.
– लोग रामलला के दर्शन और साकेत अयोध्या की परिक्रमा के लिए आते रहे हैं.
-1911 में जन्मे 81 साल के रामनाथ ने तब ट्रायल कोर्ट के सामने अपने बचपन से युवावस्था और फिर उसके बाद के अनुभव कोर्ट को बताए. जीवन में 108 बार 14 कोसी परिक्रमा पूरी की.
-रामलला के साथ बड़े शालिग्राम भी गर्भगृह में स्थापित थे.
– परिक्रमा मार्ग पर पूरब और दक्षिण को छोड़कर चारों ओर 2 फुट मोटी दीवार थी.
-निर्मोही अखाड़ा रामलला की एडवर्स कस्टडी का दावा कर रहा हो लेकिन इस जगह को रामजन्मस्थ मानने में कोई विवाद नहीं.
– तीन किस्म की परिक्रमा होती है. 14 कोसी, पंचकोसी और अन्तरगृही परिक्रमा यहां श्रद्धालु करते हैं.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा कि विवादित ढांचे में बैरिकेडिंग कब की गई और क्यों?
वैद्यनाथन: 1864 से 1875 के बीच जब विवाद बढ़ा तब बैरिकेडिंग कर अलग परिसर बनाए गए.

रामसूरत तिवारी एक और गवाह का बयान
-1942 में पहली बार अयोध्या आया. सर्यूस्नान, दर्शन हनुमान गढ़ी, कनकभवन, जन्मभूमि किए.
– हनुमतद्वार पर द्वारपालों की आकृतियां और कमल फूल की आकृतियां थीं.
– सिंहद्वार, रामचबूतरा, तीन गुंबद मुख्य मंदिर का गर्भगृह.
-हनुमद्द्वार पर वराह की आकृति थी.
– कसौटी पत्थर के खंभों पर प्राचीन हिन्दू मंदिरों में सुलभ आकृतियां खुदी थी.
– 1934 से 1949 तक मुस्लिम इस जगह नहीं आते थे.

जस्टिस बोबड़े ने कहा कि मुस्लिम गवाहों ने भी तो गवाही दी होंगी. आप हमें वो भी बताएं.

वैद्यनाथन:– एक मुस्लिम गवाह के हवाले से कहा गया कि फैज़ाबाद के इस मुस्लिम ने कोर्ट को बताया था कि उसके मोहल्ले के मुस्लिम भी दैनिक नमाज़ पढ़ते थे लेकिन नहीं पता कहां पढ़ते थे और कितनी बार? हां शुक्रवार को मस्जिद में नमाज़ के लिए जाते थे. – 1834 से हमारा परिवार यहां है लेकिन किसी को भी यहां नमाज़ पढ़ते नहीं देखा.

मोहम्मद हाशिम- पलेंटिफ्फ नम्बर 2 गवाह 5
-जन्मभूमि के आसपास कई मन्दिर थे. लेकिन कितने थे पता नहीं. मुख्य मंदिर को हिन्दू रामजन्मभूमि मन्दिर कहते हैं तो मुस्लिम बाबरी मस्जिद, लेकिन लोग जन्मस्थान मन्दिर के नाम से ही लोग बोलते रहे हैं.
-मन्दिर के पूर्वी मुख्यद्वार और उसके अंदर काले कसौटी पत्थर के 16 खंभे थे, जिनपर देवी देवता अंकित थे. अयोध्या की किसी भी मस्जिद में काले कसौटी पत्थर के खंभे नहीं हैं.
– उन कसौटी खंभों पर मानवीय और हिन्दू देवी देवताओं की आकृतियां बनी थीं.
– जहां जीव जंतु, पशु पक्षी देवी देवता खुदे उकेरे गए हों वहां मुस्लिम नमाज़ अदा नहीं करते हैं.
-यही वजह है कि विवाद के बावजूद वहां मुस्लिम नमाज़ अदा नहीं करते थे.
– ये सच है कि दुनिया भर से हिन्दू यहां तीर्थ दर्शन के लिए आते रहे हैं.
– पंचकोसी परिक्रमा इसी विवादित स्थल के चारों ओर होती रही है. ये सदियों से लोग कर रहे हैं और मैं बचपन से ये देखता आ रहा हूँ.

हाजी महमूद अहमद का बयान
-सीतारसोई की जगह चूल्हा चौका और बेलन थे. मुझे नहीं पता कि वो किसने बनाए
-पूर्वी गेट के अंदर काले पत्थर के खंभे थे लेकिन वो कसौटी के थे ये मुझे नहीं पता.
-रामकथा कुंज में मैने काफी पत्थर देखे थे.
– मैं अपने एक हिन्दू दोस्त के साथ जन्मभूमि में गया था. परिक्रमा भी थी.

मोहम्मद यासीन, (1996 में अयोध्यावासी)  (उम्र-66 साल) की गवाही

-हज़ारों लोग तीर्थ पूजा परिक्रमा के लिए आते थे.
– एक इमाम था. कोई केयरटेकर नहीं था मस्जिद का. सुन्नी वक्फ बोर्ड का कोई नुमाइंदा नहीं था वहां.

मोहम्मद कासिम अंसारी (74) (2002 में गवाही)
-रामकोट विवादित स्थल से 200 मीटर दक्षिण में है. मेरा घर वहां से थोड़ा ही दूर है.

पंचकोशी परिक्रमा मार्ग के पास. अधिकतर मन्दिर जैसे हनुमान गढ़ी, कनक भवन और हिंदू तीर्थ पंचकोशी परिक्रमा मार्ग पर ही हैं.

महंत भास्कर दास, निर्मोही अखाड़ा
-अन्तरगृही परिक्रमा 45 मिनट.
-पंचकोशी 2.30तीन घण्टे और 14 कोसी दौड़ते हुए 6 घन्टे में कर सकते हैं.
– 1934 से 92 तक गर्भगृह में मूर्तियां रखी हुई थीं.

आपको बता दें कि इस मामले में कल भी सुनवाई की जाएगी.

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