चेन्नई. डीएमके के दिवंगत नेता और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि का दक्षिण भारत में मंदिर बनने जा रहा है. अनुसूचित जाति के अरुणथथियार समुदाय के लोग करुणानिधि को भगवान की तरह पूजते हैं क्योंकि उन्होंने इस समुदाय के लोगों को अलग से सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण दिलवाया था. तमिलनाडु के कुचिकडु गांव में करुणानिधि का मंदिर बनाया जा रहा है. इस मंदिर की लागत 30 लाख रुपये है, रविवार को इसकी भूमि पूजा की गई है.

एम करुणानिधि को दक्षिण भारत की राजनीति का पितामह माना जाता है. पिछले साल 7 अगस्त को करुणानिधि दुनिया को अलविदा कह गए थे. उनके निधन से तमिलनाडु में मौजूद हजारों समर्थकों को धक्का सा लगा था. करुणानिधि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) पार्टी के प्रमुख नेता थे. वे 12 बार विधायक और पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके हैं.

लेखक से राजनेता बने करुणानिधि ने दक्षिण भारत में द्रविणियन आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. साथ ही उन्होंने अपनी जिंदगी में कभी चुनाव नहीं हारा. 1969 में वे डीएमके के मुखिया बने और तब से लेकर अपनी मृत्यु तक वे इस पर पर बने रहे.

2009 में एम करुणानिधि की डीएमके सरकार ने अरुणथथियार समुदाय को अनुसूचित जाति वर्ग में विशेष आरक्षण दिया था. राज्य सरकार ने अरुणथथियार को 18 प्रतिशत एससी आरक्षण में अलग से 3 प्रतिशत का आरक्षण अरुणथथियार समुदाय को दिया था. इस समुदाय में चक्कीलियान, मदरई, मडिगा, पगाडई, थोती और आदि आंध्रा जैसी जातियां शामिल हैं.

दक्षिण भारत में लोग मशहूर लोगों को भगवान की तरह पूजते हैं. साउथ में कई नेता-अभिनेता के मंदिर बने हैं. दक्षिण भारतीय एक्ट्रेस खुशबू का तिरुचिरापल्ली में मंदिर बना है. एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी का भी आंध्रप्रदेश के नेल्लोर में मंदिर मौजूद है. इसके अलावा एक्टर रामचंद्रन, एनटी रामाराव, पवन कल्याण जैसे लोगों को भी मंदिर में भगवान की तरह पूजा जाता है.

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