हैदराबाद. तेलंगाना में कांग्रेस के 12 विधायकों ने पार्टी को तेलंगाना राष्ट्र समिति, टीआरएस में विलय करने की मांग की है. कांग्रेस के 12 विधायकों ने गुरुवार को तेलंगाना विधानसभा स्पीकर पोचाराम श्रीनिवास रेड्डी से मुलाकात की और कांग्रेस विधायकों को सत्तारूढ़ पार्टी टीआरएस के साथ विलय करने की अर्जी दी है. इसके तुरंत बाद तेलंगाना कांग्रेस के चीफ एन उत्तम कुमार रेड्डी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस मसले पर कांग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से लड़ेगी. वर्तमान में तेंलगाना में कांग्रेस के 18 विधायक हैं, यदि स्पीकर इन विधायकों की अर्जी मंजूर कर देते हैं तो तेलंगाना कांग्रेस विधायकों का मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव उर्फ केसीआर की टीआरएस में विलय हो जाएगा.

तेलंगाना में साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में केसीआर की टीआरएस ने 119 में से 88 सीटों पर जीत दर्ज की थी. वहीं कांग्रेस को 19, एआईएमआईएम को 7, टीडीपी को 2, बीजेपी को 1 और अन्य को 1 विधानसभा सीट पर जीत मिली थी. हालांकि बाद में तेलंगाना कांग्रेस चीफ उत्तम कुमार रेड्डी हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव जीत गए और उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. वर्तमान में तेलंगाना विधानसभा में कांग्रेस के 18 विधायक हैं.

सदन में यदि किसी पार्टी के सदस्य दल बदल करते हैं तो नियमों के मुताबिक उन्हें विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ता है. हालांकि पार्टी के यदि दो तिहाई विधायक दूसरी पार्टी में विलय करवाने के लिए तैयार हो जाते हैं तो बहुमत के आधार पर स्पीकर विलय की मंजूरी दे सकते हैं. इससे विधायकों की सदस्यता बरकरार रहती है. तेलंगाना में कांग्रेस विधायकों की संख्या 18 है और इनमें से दो तिहाई यानी कि 12 विधायक विलय के लिए तैयार हैं. ऐसे में स्पीकर कांग्रेस का टीआरएस में विलय की मंजूरी दे सकते हैं.

दूसरी तरफ तेलंगाना कांग्रेस चीफ उत्तम कुमार रेड्डी ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि वे लोकतांत्रिक तरीके से इस मुद्दे पर लड़ेंगे. वे सुबह से स्पीकर से मुलाकात करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन वे गायब हैं. लोग हमारी स्पीकर से बातचीक करवाने में मदद करें.

वहीं लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कई राज्यों में कांग्रेस की स्थिति सही नहीं दिख रही है. एक दिन पहले महाराष्ट्र में भी पूर्व नेता प्रतिपक्ष राधाकृष्ण पाटिल और पूर्व मंत्री अब्दुल सत्तार ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था. बताया जा रहा है कि दोनों नेता कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल होने वाले हैं.

दूसरी ओर पंजाब कांग्रेस में भी मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के बीच तकरार जारी है. गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में सिद्धू शामिल नहीं हुए. जिसके बाद खबर है कि सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सिद्धू से शहरी विकास मंत्रालय का प्रभार छिन लिया है.

इसी तरह राजस्थान कांग्रेस में भी फूट जारी है. वहीं सीएम अशोक गहलोत ने 3 दिन पहले राज्य में लोकसभा चुनाव की हार का ठिकरा डिप्टी सीएम सचिन पायलट के सिर पर फोड़ दिया. जिसके बाद दो कांग्रेस विधायक सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की मांग पर अड़ गए हैं.

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