नई दिल्ली:कल यानी 13 अगस्त को हरियाली तीज का त्यौहार मनाया जाएगा. हिन्दू धर्म में हरियाली तीज का महत्व काफी पुराना है. हरियाली तीज की पूजा शाम के समय की जाती है जब दिन और रात का मिलन होता है. हर पूजा की तरह हरियाली पूजा भी साफ कपड़े पहन कर की जाती है. हर साल ये पर्व श्रावण शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि में मनाया जाता है. माना जाता है कि भगवान शिव को माता पार्वती ने बड़े तप कर के प्राप्त किया था. तीज का त्यौहार कुंवारी लड़कियां मन भावन पति के लिए रखती है और विवाहित महिला अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखती है. हरियाली तीज में चारों तरफ हरियाली रहती है. साल में चार बार तीज मनाई जाती है पर हरियाली तीज का विशेष महत्व है.

हरियाली तीज क्यों मनाई जाती है
सुहागन महिलाओं के लिए तीज का ज्यादा महत्व होता है. इस व्रत का मानना है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को तन मन से प्रप्त किया था तब भगवान शिव खुश हो कर उन को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया था. हरियाली तीज में झूले का भी बहुत महत्व होता है. महिलाएं गीत गाती है और झूले झूलती हैं. हरियाली तीज में माता पार्वती की सवारी बड़े धूमधाम से निकाली जाती है. महिलाएं अपना पूरा श्रृंगार करती हैं. वैसे तो तीज का त्यौहार पूरे भारत भर में मनाया जाता है लेकिन मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी मनाया जाता है.

क्या विधि है हरियाली पूजा की
हरियाली पूजा में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश की मूर्ति को काली मिट्टी से बनाया जाता है. माता पार्वती की मूर्ती को सुहाग की चीजों से सजाया जाता है. इसके बाद तीज की कथा सुननी चाहिए. कथा समाप्त होने के बाद आरती करनी चाहिए. हरियाली पूजा की रात में जागरण भी करा सकते हैं. और सुबह खीर, हल्वे और मालपुए का भोग करें. हरियाली पूजा खत्म होने के बाद सरी चीजों को किसी नदी या तालाब में प्रवाहित करें.

हरियाली पूजा में शीघ्र विवाह का क्या कारण है
अविवाहित कन्याओं को इस दिन उपवास करना चाहिए. फिर मा हर-गौरी की पूजा अर्जना करना चाहिए. जिस की भी कुंडली में बाधक योग हो पूजा करने के बाद सभी नष्ट हो जाते है. इन सभी चीजों का तभी लाभ होगा जब अविवाहित लड़की इसे खूद करें.

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