उत्तर प्रदेश. अगले वर्ष देश के पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, इस कड़ी में उत्तर प्रदेश में सियासत सबसे ज़्यादा गरमा रही है. उत्तर प्रदेश में हर पार्टी ने अपनी ताकतें झोंकनी शुरू कर दी है. चाहे बात कांग्रेस की हो, समाजवादी पार्टी की हो या बहुजन समाजवादी पार्टी की, सभी पार्टी यूपी की सत्ता पर काबिज़ होने की तैयारियों में जुटी हैं. ऐसे में पार्टियां एक दुसरे पर वार-पलटवार कर रही हैं. अब इस वार-पलटवार की चपेट में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी आ गए हैं. अखिलेश यादव अपने ‘चिलमजीवी’ वाले बयान के चलते संतो ( Swami Jitendranand attacks Akhilesh yadav ) के निशाने पर हैं.

संत जितेंद्रानंद का अखिलेश यादव पर वार

अखिलेश यादव इस समय संतों के निशाने पर हैं. अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने गुरुवार को वाराणसी में कहा कि अखिलेश यादव के इस अनर्गल बयान से देश भर के सभी संत आक्रोशित हैं, उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि भाजपा पर हमला करने के लिए पवित्र भगवा वस्त्रधारी संतों को चिलमजीवी कहना सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को महंगा पड़ेगा. स्वामी जितेंद्रानंद ने कहा कि,

“ऐसे सभी नेता जो लगातार सनातन धर्म, भगवा व संतों पर अपमानजनक टिप्पणी कर रहे हैं, उन्हें संत समाज चेता रहा है कि अपनी ओछी राजनीति में हमें न घसीटें, अन्यथा सनातनियों के जनआक्रोश के रूप में दुष्परिणाम भुगतने पड़ेंगे.”

क्या था अखिलेश यादव का ‘चिलमजीवी’ बयान

बीते कुछ दिनों से अखिलेश यादव संतों के निशाने पर हैं. दरअसल, अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ पर बिना नाम लिए हमला किया था. उन्होंने गाज़ीपुर में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि उत्तर प्रदेश में लाल, हरा, नीला, पीला रंग है, उत्तर प्रदेश में इंद्रधनुष के रंग हैं, ऐसे में कोई एक रंग वाले चिलमजीवी कभी उत्तर प्रदेश को खुशहाली के रास्ते पर नहीं ले जा सकते. अपने इस बयान को लेकर अखिलेश यादव अब संतों के निशाने पर हैं.

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