नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने असम की नागरिकता मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि नागरिकता साबित करने के लिए पंचायत का सर्टिफिकेट वैध है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने गुवहाटी हाइकोर्ट के फैसले को रद्द किया, जिसमें हाई कोर्ट ने ग्राम पंचायत द्वारा जारी प्रमाणपत्र को वैध नहीं माना था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NRC को लोगों को श्रेणीबद्ध करने के लिए नहीं बल्कि जोडने के लिए बनाया गया. फिलहाल असम में 29 लाख लोगों को पंचायत द्वारा सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं. दरअसल गुवहाटी हाईकोर्ट के फैसले को कई याचिकाओं में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है जिसमें कहा गया था कि नागरिक की पहचान के लिए ग्राम पंचायत द्वारा जारी प्रमाणपत्र को वैध नहीं माना जाएगा.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को विदेशियों की पहचान कर वापस भेजने के लिए नेशनल रजिस्टर फॉर सिटीजन्स NRC बनाने के निर्देश दिए थे. 25 मार्च 1971 के बाद आए विदेशियों की पहचान कर उन्हें निर्वासित करना था. इनमें बंगलादेशी शामिल हैं. ये काम असम में चल रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने पाया था कि अवैध रूप से देश में घुस आने वाले लोगों के मामलों का निपटारा करने के लिए बनाए गए पंचायत की संख्या कम है. अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि यह गौर करने वाली बात है कि 1961 से 1965 के बीच करीब डेढ़ लाख लोगों को निर्वासित किया गया, लेकिन 1985 से लेकर अब तक सिर्फ 2000 लोगों का ही निर्वासन संभव हो सका है.

बांग्लादेशियों के अवैध रूप से भारत में घुस आने से संबंधित कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था कि वह आज से हर तीन महीने में दिए गए निर्देशों पर अमल की समीक्षा करेगी. कोर्ट ने ये भी कहा था कि आजादी के 67 साल बीत जाने के बाद भी सीमा की पूरी तरह से बाड़बंदी नहीं हो सकी है. संभव है कि निर्वासित किए गए लोग फिर से वापस आ जाएं. कोर्ट ने कहा कि 1985 में हुए असम समझौते के मुताबिक, 25 मार्च 1971 के बाद आए विदेशियों की पहचान कर उन्हें निर्वासित करना था. साथ ही समझौते में सीमा पर पूरी तरह से बाड़बंदी की भी बात थी. इस समझौते पर केंद्र, असम सरकार और ऑल असम स्टूडेंट यूनियन ने हस्ताक्षर किए थे. लेकिन न तो केंद्र और न ही राज्य सरकार ने इस दिशा में समुचित काम किया.

नागरिकता कानून की धारा 6(ए) की संवैधानिकता और असम में प्रवेश कर रहे अवैध आप्रवासियों की नागरिकता का मानक क्या हो ये तय करने के लिए याचिका दायर की गई है. नागरिकता तय करने के लिए पहला सवाल ये है कि जो बांग्लादेशी 1951 में भारत आए उन्हें नागरिकता दी जाए या जो 1971 के बाद आए उन्हें. दूसरा ये कि जो विदेशी 1971 के बाद भारत में पैदा हुए उन्हें नागरिकता दी जाए या नहीं.

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