नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में राफेल डील की पुनर्विचार याचिका पर चल रही सुनवाई पूरी हो गई है. सुप्रीम कोर्ट ने फैसले को सुरक्षित रखा है. इससे पहले बहस की शुरुआत करते हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बताया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने इस केस में हलफनामा दायर किया है. विपक्ष के वकील एमएल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि केंद्र सरकार ने एफिडेविट में यह नहीं बताया कि जिन्होंने दस्तावेज चोरी किए, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? क्या कोई एफआईआर दर्ज की गई या नहीं?

इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि आपने दस्तावेजों के विशेषाधिकार का दावा किया है, आप हमें संतुष्ट कीजिए. सुनवाई के दौरान वेणुगोपाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने खुद अपने फैसले में सीक्रेट नोट को प्रिविलेज्ड कहा है. ये कागजात भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के तहत बिना सरकार की इजाजत के कोर्ट के सामने नहीं रखे जा सकते. इस पर कोर्ट ने कहा, आप किस प्रिविलेज्ड का दावा कर रहे हैं? आपने उन्हें खुद कोर्ट के सामने रखा है. इस पर वेणुगोपाल ने कहा कि दस्तावेजों को चुराए जाने के बाद कोर्ट में पेश किया गया.

यहां पढ़ें Supreme Court Rafale Deal Hearing LIVE Updates:

Highlights

राफेल डील पुर्नविचार याचिका पर सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

राफेल डील की पुर्नविचार याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसले को सुरक्षित रखा है. कोर्ट तय करेगा कि क्या केंद्र सरकार इन दस्तावेज पर वि़शेषाधिकार का दावा कर सकती है या नहीं और क्या कोर्ट रफाल संबंधी दस्तावेजों पर भरोसा कर सकती है या नहीं?

बिना दस्तावेज देखे हैं हम कैसे कह सकते है कि उनमें क्या हैं?

जस्टिस जोसफ ने कहा कि हमनें अभी दस्तावेज नहीं देखे हैं. ऐसे में हम कैसे कह सकते है कि वो दस्तावेज क्या हैं? किसी दूसरे को भी राफेल बेचा गया है अगर कीमत सामने आती है तो क्या दूसरा देश फ्रांस से नही पूछेगा की उन्हें इस रकम पर क्यों दी गई. इस लिए इसको गोपनीय रखा जा रहा है.

दो सरकारों का समझौता, गोपनीय रखने के लिए बाध्य सरकार- अटॉर्नी जर्नल

अटॉर्नी जर्नल ने कहा कि समझौता दो सरकारों के बीच हुआ है. हम बाध्य है जानकारी को गोपनीय रखने के लिए. चुनाव आयोग का पश्चिम बंगाल के चुनावी दृष्टि से संवेदनशील राज्य होने की दलीलों की विस्तृत और गहराई से जांच पड़ताल कर जायज़ा लेने के लिए संबंधित डिप्टी इलेक्शन कमीशनर को पश्चिम बंगाल भेज रहा है. DEC राज्य में चुनाव की तैयारियों का जायजा लेने जाएंगे.

प्रशांत भूषण ने कहा- भ्रष्टाचार के चलते इस मामले में कोर्ट की दखल नहीं चाहती सरकार

प्रशांत भूषण ने कहा कि इस मामले में हुए भ्रष्टाचार के चलते सरकार चाहती है कि कोर्ट दखल ना दे. मीडिया के सूत्र क्या हैं ये हम कैसे बता सकते हैं, कोई पत्रकारों को सोर्स बताने पर विवश नहीं कर सकता. पत्रकार के लिए किसी भी कानून में सोर्स जाहिर करने की पाबंदी नहीं है. 2जी मे भी तो यही हुआ था कोई अनजान आदमी cbi निदेशक रणजीत सिन्हा के घर के मेनगेट पर रखा एंट्री रजिस्टर दे गया था जिससे कई अहम खुलासे हुए कि कौन कौन कब कब cbi निदेशक के घर उनसे मिलने गया था. कोल स्कैम मामले में भी उसी रजिस्टर से कई खुलासे हुए.

वेणुगोपाल ने कोर्ट में कहा कि ये सरकारों के बीच का समझौता था

प्रशांत भूषण की दलीलों के बाद अटॉर्नी जर्नल वेणुगोपाल ने कोर्ट में कहा कि ये सरकारों के बीच का समझौता था इसलिए केंद्र ने सीएजी से कहा था कि वो कीमत का जिक्र ना करे.

सीएजी क्या रिपोर्ट करेगा ये सरकार को कैसे पता चला?- प्रशांत भूषण

प्रशांत भूषण ने कोर्ट में कहा कि अब सरकार उच्च पदाधिकारियों के खिलाफ दस्तावेजों की कथित चोरी के आरोप में कार्रवाई कर सकती है. अगर चोरी हुई तो fir अब तक क्यों नहीं कराई? सरकार खुद ही समय समय पर अपनी जरूरत के मुताबिक इन दस्तावेजों का खुलासा करती रही है. हमारे ऊपर उन गोपनीय दस्तावेजों की चोरी कर सार्वजनिक करने का ये आरोप गलत हैं. डिफेंस परचेज के कई दस्तावेज और डिटेल नोट सरकार पहले भी सार्वजनिक कर चुकी है. ऐसे 10 मामले हैं, सीएजी क्या रिपोर्ट करेगा ये सरकार को कैसे पता चला?

सरकार साबित करे इन दस्तावेज के सार्वजनिक होने से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा- प्रशांत भूषण

प्रशांत भूषण ने कोर्ट में कहा कि सरकार को साबित करना होगा कि इन दस्तावेज के पब्लिकेशन राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है. CAG की रिपोर्ट में भी रक्षा संबंधी सौदों की जानकारी दी होती है. सरकार की इन दलीलों को माना नहीं जा सकता

प्रशांत भूषण ने कोर्ट में कहा- ये दस्तावेज तो पहले ही पब्लिश हो चुके हैं

वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि ये सभी दस्तावेज पहले ही पब्लिश हो चुके हैं, इसलिए इन पर विशेषाधिकार का दावा नहीं किया जा सकता. RTI के तहत भी जनहित की शर्त है. हम भी तो पहले से सार्वजनिक तौर पर प्रकाशित दस्तावेजों को ही सबके सामने किया है. कोई भी अनपब्लिश दस्तावेज़ नहीं है जो हमने दिखाया हो.

प्रशांत भूषण ने कोर्ट में कहा कि विशेषाधिकार की आड़ में मनमानी नहीं करे सरकार

प्रशांत भूषण ने कोर्ट में कहा कि सरकार विशेषाधिकार की आड़ में मनमानी नहीं कर सकती. हमारी मंशा राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालना नहीं है. ये दस्तावेज़ तो लंबे समय से पब्लिक डोमेन में हैं. हमने तो उनके हवाले से जनहित में सरकार और कोर्ट का ध्यान खींचा है.

प्रशांत भूषण ने सरकार की दलीलों को लचर बताया

Supreme Court Rafale Deal Hearing LIVE Updates: प्रशांत भूषण ने प्रारंभिक आपत्तियों पे बात करने की कोशिश की लेकिन कोर्ट ने कहा कि आप सरकार के हलफनामे पर जवाब दें. जिसके बाद भूषण ने सरकार की दलीलों को लचर बताया.

सीजेआई ने कहा कि संगठनों में अपवाद होते हैं लेकिन एक दायरे तक सीमित रहने चाहिएं

Supreme Court Rafale Deal Hearing LIVE Updates: सीजेआई ने कहा कि यहां तक कि संवेदनशील संगठनों में भी अपवाद होते हैं. लेकिन ये अपवाद सिर्फ एक दायरे तक सीमित रहने चाहिएं. कोर्ट ने प्रशांत भूषण से कहा कि आप सरकार के हलफनामे पर सीधी बहस भी कर सकते है या फिर जवाब भी दाखिल कर सकते हैं.

गोपनीय दस्तावेजों की नकल करना अपराध- केके वेणुगोपाल

अटॉर्नी जर्नल वेणुगोपाल ने ऑफिसियल सीक्रेट एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि कि गोपनीय दस्तावेज़ का चोरी से नकल करना भी अपराध है. अटोर्नी जर्नल ने RTI एक्ट के हवाले से भी ये जानकारी हासिल करने की मनाही की दलील दी.

दस्तावेजों को आरटीआई की धारा 8 (1) (ए) के तहत प्रकटीकरण से छूट है

दस्तावेजों को सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 8 (1) (ए) के तहत प्रकटीकरण से भी छूट है. बोलने की स्वतंत्रता पर इस केस से कोई असर नहीं पडेगा. ये देश की संप्रुभता, सुरक्षा और दूसरे देशों के साथ संबंधों का मामला है.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा- दस्तावेजों के विशेषाधिकार का जो दावा है, उसमें हमें संतुष्ट कीजिए

CJI ने केंद्र सरकार को कहा कि आपने दस्तावेजों के विशेषाधिकार का दावा किया है,आप हमें संतुष्ट कीजिए. सुप्रीम कोर्ट ने खुद अपने फैसले में सीक्रेट नोट को प्रिविलेज्ड कहा है. ये कागजात भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के तहत भी बिना सरकार की इजाजत कोर्ट के सामने नहीं रखे जा सकते.

विपक्ष के वकील ने कहा- राफेल के दस्तावेज चोरी चोरी के खिलाफ केंद्र सरकार ने क्या कार्रवाई की?

केंद्र सरकार की तरफ से AG केके वेणुगोपाल ने बहस की शुरुआत की. केंद्र सरकार ने कोर्ट में बताया कि उन्होंने हलफनामा दायर किया हैं. वकील एम एल शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में ये नही बताया कि जिसने दस्तावेजों को चोरी किया था उसके खिलाफ क्या करवाई की गई है. क्या कोई FIR दर्ज की गई है या नही?

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