नई दिल्ली: सीएए और एनआरसी के खिलाफ दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में सड़कों पर लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी के आधार पर ही लोकतंत्र काम करता है. शीर्ष अदालत ने कहा कि हम ये नहीं बोल रहे कि लोग प्रदर्शन नहीं कर सकते लेकिन सवाल ये है कि वो प्रदर्शन कहां कर सकते हैं? कोर्ट ने वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन से मिलकर उनसे बात करने को कहा है. इसके अलावा कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से भी कहा है कि वो प्रदर्शनकारियों को वैकल्पिक जगह मुहैया करवाएं जहां बैठकर वो प्रदर्शन कर सकें.

गौरतलब है कि करीब एक हफ्ते पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि लोग लंबे समय तक सड़क जाम कर प्रदर्शन नहीं कर सकते जिससे लोगों को आने-जाने में परेशानी हो. कोर्ट ने कहा था कि लोगों को प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है लेकिन उसके लिए जगह तय होनी चाहिए, ये नहीं कि सड़क या पार्क को जाम कर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया. प्रदर्शन के बीच चार महीने के बच्चे की मौत का मामला भी सुप्रीम कोर्ट ने उठाया था. कोर्ट ने कहा था कि चार महीने का बच्चा शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन में हिस्सा लेने गया था?

गौरतलब है कि सोमवार को शाहीन बाग की बुजुर्ग महिलाओं ने गृहमंत्री अमित शाह से भी मिलने की कोशिश की लेकिन उन्हें नहीं मिलने दिया गया. हालांकि केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कुछ लोगों को अगर सीएए और एनआरसी को लेकर मन में सवाल हैं तो उनकी शंका का समाधान होगा. शाहीन बाग में प्रदर्शन कर रहे लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल समय लेकर गृहमंत्री से मुलाकात कर सकता है.

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