नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस विवादित फैसले पर अपनी आपत्ति दर्ज की है जिसमे कहा गया था कि स्किन टू स्किन टच ही POCSO एक्ट के तहत यौन शोषण है. इस फैसले पर अब सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं और कहा है कि यदि कोई व्यक्ति ग्लव्स पहनकर छेड़छाड़ करता है तो पॉक्सो एक्ट के मुताबिक उसे सज़ा नहीं हो सकती.

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने इस फैसले को बताया एक खतरनाक मिसाल

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के 27 जनवरी के उस फैसले की सुनवाई की जिसमे कहा गया था कि स्किन टू स्किन टच ही यौन शोषण है, यानी अगर कोई व्यक्ति दस्ताने पहनकर छेड़छाड़ करता है तो उसे पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी करार नहीं किया जाएगा. इस फैसले को अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने निराधार बताते हुए कहा कि इससे समाज में ‘खतरनाक मिसाल’ कायम होगी जो बिल्कुल भी सही नहीं है. उन्होंने कहा कि, ‘अगर कल को कोई व्यक्ति सर्जिकल ग्लव्स पहनकर किसी महिला के साथ छेड़छाड़ करता है तो इस अपराध के लिए उसे हाईकोर्ट के विवादित फैसले के अनुसार यौन उत्पीड़न के लिए सजा नहीं दी जा सकेगी. पिछले एक साल में पॉक्सो एक्ट के तहत 43 हजार अपराध दर्ज हुए हैं और इस परिभाषा के तहत कोई भी व्यक्ति ग्लव्स पहनकर किसी भी बच्चे पर यौन हमला कर सकता है और सजा से बच सकता है.’

क्या था बॉम्बे हाई कोर्ट का विवादित फैसला

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक 12 साल की बच्ची साथ छेड़छाड़ के मामले में आरोपी को आईपीसी की धारा 354 के तहत तो दोषी माना था, लेकिन पॉक्सो एक्ट के तहत उसे दोषी नहीं माना गया था. इस मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पुष्पा गनेड़ीवाल ने कहा था कि, “यह अपराध आईपीसी की धारा 354 के तहत ‘छेड़छाड़’ का अपराध तो होगा लेकिन ये पॉक्सो एक्ट की धारा 8 के तहत यौन शोषण नहीं होगा”. हालांकि अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने इसे एक खतरनाक मिसाल बताते हुए इस फैसले पर रोक लगा दी थी. अब इस मामले की सुनवाई 14 सितंबर को होगी.

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