नई दिल्ली. जम्मू- कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने और केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद घाटी के वर्तमान हालात को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है जिसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में आज हुई. कांग्रेस कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला ने याचिका दायर की थी जिस पर जस्टिस अरूण मिश्रा, एम आर शाह और अजय रस्तोगी की बेंच सुनवाई कर रही है. सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि त्वरित सुनवाई से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में जम्मू कश्मीर के हालात के बारे में चिंता जाहिर की और सरकारी पक्ष को समय दिया. सुप्रीम कोर्ट दो हफ्ते बाद इस मामले की दोबारा सुनवाई करेगा.

इसके अलावा कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन ने भी याचिका दायर की थी. इसमें कहा गया था कि आर्टिकल 370 को हटाए जाने के बाद राज्य में पत्रकारों पर प्रतिबंध लगा दिए गए थे जिसे तत्काल हटाना चाहिए. पूनावाला ने कहा कि वो आर्टिकल 370 के बारे में कुछ नहीं कहेंगे लेकिन राज्य से कर्फ्यू, फोन, इंटरनेट और न्यूज चैनल से प्रतिबंध हटाए जाने चाहिए. अदालत ने इस मामले पर तुंरत सुनवाई से इनकार कर दिया है.

कश्मीर टाइम्स की एडिटर की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो पहले रजिस्ट्री में जाएं. वकील वृंदा ग्रोवर ने तुरंत सुनवाई की मांग की थी. उन्होंने दलील दी थी कि घाटी में प्रेस की आजादी का उल्लंघन किया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वें मामले को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री के पास लेकर जाएं. इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर में फिलहाल किसी भी तरह के हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है.

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पढ़ें आज क्या हुआ सुप्रीम कोर्ट में

सुप्रीम कोर्ट ने एजी (एटॉर्नी जनरल) से पूछा कि कश्मीर में ऐसे हालात कब तक रहेंगे. एजी ने कहा कि कानून व्यवस्था हमारी प्राथमिकता है फिर भी लोगों को कम से कम दिक्कत हो इसकी कोशिश की जा रही है. रिस्ट्रिक्शन में भी परिस्थिति के हिसाब से राहत दे रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इसके बाद कहा कि आप कोशिश करिए कि जल्द से जल्द जो सुविधाएं हैं उन्हें बहाल कर दिया जाए. इसके बाद एजी ने कहा कि हम रोज परिस्थिति को देख रहे हैं. इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की, ये कह रहे हैं कि रोज परिस्थिति को देख रहे हैं ऐसे में इन्हें कुछ समय देना चाहिए. इसके बाद याचिकाकर्ता तहसीन पूनावाला के वकील ने कहा, हॉस्पिटल, परिवार से  संपर्क करने तक में दिक्कत हो रही है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप हमें बताएं किसे क्या दिक्कत आ रही है, हम आदेश पारित करेंगे. इस पर एजी ने कहा कि किसी भी किस्म की अप्रिय घटना नहीं हुई है. सुप्रीम कोर्ट ने फिर टिप्पणी की- कोई नहीं जानता कि क्या हो रहा है. यह बेहद संवेदनशील मामला है. सरकार पर विश्वास करना चाहिए. हमारे पास वास्तविक तस्वीर होनी चाहिए कुछ समय के लिए रुकना चाहिए. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले की दो हफ्ते बाद सुनवाई करेंगे. 

नरेंद्र मोदी सरकार ने लिया ऐतिहासिक फैसला
बता दें कि नरेंद्र मोदी सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए जम्मू कश्मीर से धारा 370 को खत्म कर दिया. (पूरी तरह नहीं) . इसके साथ ही जम्मू कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश बनाने का फैसला किया गया. हालांकि प्रधानमंत्री ने कहा कि हालात सामान्य होते ही जम्मू कश्मीर को दोबारा राज्य का दर्जा दे दिया जाएगा. वहीं लंबे समय से लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाने की मांग हो रही थी. मोदी सरकार ने लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देते हुए उसे जम्मू कश्मीर से अलग कर दिया. इसके बाद कल ही घाटी में ईद मनाई गई. किसी भी तरह की हिंसक घटना और जान माल के नुकसान की खबर नहीं आई है.

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