नई दिल्ली. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने अयोध्या राम मंदिर मामले में आज की सुनवाई खत्म हो गई है. आज की कार्यवाही खत्म होते वक्त निर्मोही अखाड़े की तरफ से बहस जारी थी. कल भी निर्मोही अखाड़े की तरफ से बहस जारी रहेगी. इस सुनवाई को लेकर गोविंदाचार्य की ओर से कहा गया कि कम से कम सुनवाई को लिखा जाए और रिकार्ड किया जाए लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दिया है. इससे पहले इसकी लाइव स्ट्रीमिंग की मांग को चीफ जस्टिस ने ठुकरा दिया था. इस संवैधानिक पीठ में जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. ए. नजीर भी शामिल हैं.

सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों वाली संविधान पीठ आज अयोध्या राम मंदिर और बावरी मस्जिद पर सुनवाई करेगी. इस मामले को सुलझाने में तीन सदस्यीय पैनल द्वारा मध्यस्थता विफल रही है और इस साल के शुरू में शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त पैनल को विभिन्न समूहों के साथ परामर्श करने और विवाद के समाधान पर चर्चा करने के लिए कहा गया था.

इस मुद्दे को लेकर सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा था कि अब प्रतिदिन सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई होगी जो सोमवार, मंगलवार, बुधवार है. पिछली सुनवाई में अदालत ने कहा था कि उसे तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल की एक रिपोर्ट मिली है, जिसकी अध्यक्षता शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश एफ. एम. आई. कलीफुल्ला कर रहे हैं.

बता दें कि इस विवाद में अयोध्या में 2.77 एकड़ भूमि शामिल है जहां 16 वीं शताब्दी की एक मस्जिद मुगल सम्राट बाबर द्वारा बनाई गई थी. वहीं दिसंबर साल 1992 में इस मस्जिद का ढांचा ढहा दिया गया था, क्योंकि लोगों का कहना है कि इस मस्जिद का निर्माण एक मंदिर के खंडहर पर किया गया था जो भगवान राम के जन्मस्थान है. इस मंदिर-मस्जिद को लेकर देश में दंगे भी हुए और मस्जिद का ढांचा ढहाने के बाद कुछ दिनों में देश भर के दंगों में 2,000 लोग मारे गए थे.

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02:16-अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि इस मामले की सुनवाई के लिए हम जल्दी में नही है. दरअसल निर्मोही अखाड़ा के वकील ने कहा कि इस मामले में वो पहले कोर्ट के सामने हाई कोर्ट के जजों ने अपने फैसले में क्या कहा है वो बात रखेंगे उसके बाद अपनी अपील पर बहस करेंगे. निर्मोही अखाड़ा के वकील ने कहा कि उसके बाद वो कोर्ट में कुछ लिखित जवाब दाखिल करने चाहते है, तब कोर्ट ने कहा ये आपका केस है आप अपना समय लीजिये. इस मामले की सुनवाई के लिए हम जल्दी में नही हैं.

12:30-इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में जमीन को तीन हिस्सों में बंटा था राम लाल विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड. लेकिन मामले की सुनवाई के दौरान निर्मोही अखाड़ा ने पूरे विवादित स्थल पर अपना अधिकार बताया है.

11:50- निर्मोही अखाड़ा ने दावा किया कि 1934 में राम जन्मभूमि पर पांच दफा नवाज़ अदा करना मुस्लिमों ने बंद कर दिया था. 16 दिसम्बर 1949 में शुक्रवार की नवाज भी अदा करना बंद ही गया था, 22-23 दिसम्बर की रात को भगवान श्री राम की मूर्ति को मस्जिद में स्थापित किया गया. निर्मोही अखाड़ा ने दूसरा साक्ष्य देते हुए कहा कि मुस्लिम धर्म में नवाज अदा करने से पहले वुजू किया जाता है, जिसमें मुस्लिम नवाज अदा करने पहले हाथ और बॉडी के अंगों को धोते है.1885 से वहाँ कोई नवाज नही अदा की गई अरसे पहले ही मस्जिद का इस्तेमाल बंद कर दिया गया.

11:34- कोर्ट के निर्मोही अखाड़े की दलीलों पर बीच बहस में टोकने पर धवन ने कहा मेरा तरीका यही है. जब कोर्ट ने तीन बार रोका तो धवन ने यही दोहराया मेरा तरीका यही है.

11:28- 16 दिसंबर 1949 में आखिरी बार नमाज़ पढ़ी गई थी जन्मभूमि पर बनाई गई उस मस्जिद में. अदालत में दावा 1961 में वक्फ बोर्ड ने दाखिल किया, मुस्लिम पक्षकार की ओर से राजीव धवन के बीच मे टोकने पर कोर्ट ने धवन को फटकारा. कोर्ट की गरिमा का ध्यान रखें और धवन ने कहा कोर्ट ने सवाल पूछा तो मैंने जवाब दिया. कोर्ट ने कहा कि हम किसी की दलील और बहस को कमतर नहीं करना चाहते.

11:26- राम मंदिर और बावरी मस्जिद की सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा- हमें संरचनाओं पर स्पष्टता दें. कहां से प्रवेश होता है सीता रसोई या हनुमान द्वार?. CJI ने यह भी पूछा कि निर्मोही अखाड़ा कैसे रजिस्टर्ड हुआ और जस्टिस नजीर ने कहा आप पहली अपील पर बहस कर रहे हैं और आपको हमें सभी विवरण देने होंगे.

11:25- बैरागियों के पंचायती मठ ने भी कहा है कि निर्मोही अखाड़ा सदियों से मंदिर का प्रभारी रहा है. किसी भी मुस्लिम ने मंदिर में प्रवेश करने का प्रयास नहीं किया. अखाड़ा एक प्राचीन संगठन है. भारत में कई मंदिरों का मालिक है, यहां तक कि झांसी की रानी ने महंतों द्वारा संरक्षित अखाड़े के ग्वालियर मंदिर में अंतिम सांस ली थी.

11:20- इस सुनवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एफएम कलीफुल्ला और आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पांचू ने मार्च में परामर्श शुरू किया था. इन कैमरा कार्यवाही आठ सप्ताह के भीतर पूरी की जानी थी, लेकिन अदालत ने 15 अगस्त तक समय सीमा बढ़ा दी.

11:14- अयोध्या राम मंदिर और बावरी मस्जिद को लेकर होने वाली सुनवाई के लिए गोविंदाचार्य की ओर से कहा गया कि कम से कम सुनवाई को लिखा जाए और रिकार्ड किया जाए लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दिया है. इससे पहले इसकी लाइव स्ट्रीमिंग की मांग को चीफ जस्टिस ने ठुकरा दिया था.

10:54- मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने अयोध्या राम मंदिर मामले की सुनवाई शुरू कर दी है. इस मामले पर आज फिर से सुनवाई हो रही है और इस संवैधानिक पीठ में जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. ए. नजीर मौजूद हैं.

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