नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना केस में पति और ससुराल वालों को मिलने वाले सेफगॉर्ड को खत्म कर दिया है. अब दहेज उत्प्रीड़न और हिंसा के मामले में पति और ससुराल वालों की तुरंत गिरफ्तारी हो सकती है. कोर्ट ने अपने पुरान फैसले में बदलाव करते हुए कहा कि पीड़िता की सुरक्षा के लिए यह करना जरूरी है. कोर्ट ने कहा कि हालांकि आरोपियों के लिए अग्रिम जमानत का विकल्प खुला रहेगा. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने कहा कि दहेज उत्पीड़न के मामले में जो सेफगार्ड दिया गया है उससे वह सहमत नहीं हैं.

तीन सदस्यीय पीठ ने माना कि दहेज उत्पीड़न संबंधित धारा 498 ए में खामियां हैं लेकिन इन खामियों को संसद को दूर करना चाहिए. कोर्ट ने संसद से कहा कि वह एक उचित नियम बनाए ताकि 498 ए के दुरूप्रयोग से बचा जा सके. कोर्ट ने कहा कि लेकिन इस वजह से 498 ए के सबसे मजबूत पक्ष यानी आरोपियों की त्वरित गिरफ्तारी को समाप्त नहीं किया जा सकता.

आपको बता दें कि इससे पहले 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना के मामले में त्वरित गिरफ्तारी को खत्म कर दिया था. दो जजों की अगुवाई वाली पीठ अपने फैसले में कहा था कि दहेज उत्पीड़न के केस में अब सीधे गिरफ्तारी नहीं होगी. इसके लिए पहले स्थानीय पुलिस प्राथमिक जांच करेगी और फिर गिरफ्तरियां होंगी. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ जनहित याचिका दायर हुई थी. इसके बाद चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने इस पर दोबारा विचार करने का फैसला किया था.

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