नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में आज यानी 16 अक्टूबर को अयोध्या राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद केस में आखिरी दिन की सुनवाई हो गई है. यह सुनवाई कुल 40 दिनों तक चली. देश की नजर इस सुनवाई से जुड़ी एक-एक अपडेट पर थी. सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता में संविधान पीठ अब इस केस में फैसला लिखेगी. लेकिन क्या आपको मालूम है कि सुप्रीम कोर्ट में सबसे लंबे वक्त तक चली सुनवाई के मामले में अयोध्या राम जन्मभूमि बाबरी केस दूसरे नंबर पर है. पहले नंबर पर केश्वानंद भारती बनाम केरल राज्य का मुकदमा है जिसकी सुनवाई 68 दिनों तक चली थी. वहीं तीसरे नंबर आधार की वैधानिकता से जुड़ा केस है जिसकी सुनवाई 38 दिनों तक चली. आसान शब्दों में जानिए क्या थे ये तीनों मामले और क्यों इनकी सुनवाई इतनी लंबी चली.

पहला केस: केश्वानंद भारती बनाम केरल राज्य
24 अप्रैल,1973 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा केश्वानंद भारती बनाम केरल राज्य में ऐतिहासिक फैसला दिया गया जिसने यह स्थापित कर दिया कि देश में संविधान सर्वोच्च है. कई अन्य मामलों में भी यह केस नजीर का काम करता है. यह सुप्रीम कोर्ट के इतिहास का वह केस है जिसकी सुनवाई सबसे लंबे वक्त तक चली.

केरल के संत केश्वानंद भारती के मठ की हजारों एकड़ जमीन को वहां की ईएमएस नंबूदरीपाद सरकार अधिग्रृहित कर ली. मठ के युवा प्रमुख केश्वानंद भारती ने सरकार के फैसले को अदालत में चुनौती दी. केरल हाईकोर्ट के समक्ष इस मठ के मुखिया होने के नाते 1970 में दायर एक याचिका में केशवानंद भारती ने अनुच्छेद 26 का हवाला देते हुए मांग की थी कि उन्हें अपनी धार्मिक संपदा का प्रबंधन करने का मूल अधिकार दिलाया जाए.

 देश की शीर्ष अदालत ने पाया कि इस मामले से कई संवैधानिक प्रश्न जुड़े हुए हैं. सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या देश की संसद के पास संविधान संशोधन के जरिए मौलिक अधिकारों में असीमित संशोधन करने का अधिकार है. गोलकनाथ केस में 1967 में सुप्रीम कोर्ट के 11 जजों की संविधान पीठ ने फैसला दिया था कि संसद को संविधान से नागरिकों को मिले मौलिक अधिकारों में किसी तरह की कटौती का अधिकार नहीं है. इसलिए जब केशवानंद भारती केस आया तो 11 से ज्यादा 13 जजों की संविधान पीठ बनाई गई. इस संविधान पीठ ने कहा कि संसद संविधान में वो ही संशोधन कर सकती है जो संविधान के मूलभूत ढांचे यानी मूल भावना के खिलाफ ना हो.

केस हारने के बाद भी देश की न्यायपालिका के हीरो क्यों बने केश्वानंद भारती
आखिरकार फैसला केश्वानंद भारती के खिलाफ 6:7 के अंतर से फैसला आया. केश्वानंद भारती भले ही मुकदमा हार गए लेकिन यह मामला मिसाल बन गया. इससे संसद और न्यायपालिका के बीच संतुलन कायम हो पाया. कमाल की बात तो यह है कि इस मामले में केश्वानंद भारती के वकील नानी पालकीवाला ने अपनी प्रतिभा के दम पर संविधान के मूल बिंदुओं की तरफ बहस मोड़ दी थी लेकिन उनके मुवक्किल केश्वानंद भारती उनसे मिले तक नहीं थे.

दूसरा केस: अयोध्या राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद केस

हिंदुओं के अराध्य भगवान श्रीराम के जन्मस्थान अयोध्या में राम मंदिर बनाने की मांग लगभग 200 साल पुरानी है. 1949 में बाबा धर्म दास द्वारा विवादित स्थल पर मूर्ति रखने के बाद यह मामला तूल पकड़ने लगा. राजीव गांधी जब प्रधानमंत्री थे तब राम मंदिर का ताला खोला गया और हिंदुओं को पूजा करने का अधिकार दिया गया.  6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया जिसके बाद देश भर में सांप्रदायिक दंगे हुए. अब फ्लैशबैक से सीधे वर्तमान में आते हैं. 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस केस में फैसला सुनाया और तीन पक्षों को जमीन बांटी थी. सभी पक्षकार इससे असंतुष्ट थे और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. 

40 दिनों की मैराथन सुनवाई हुई खत्म, अब आएगा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मध्यस्थता पैनल भी गठित किया लेकिन सारी कोशिशें बेकार साबित हुईं. आखिरकार कोर्ट ने लगातार सुनवाई का फैसला लिया. 40 दिनों तक  इस केस की सुनवाई चली जो 16 अक्टूबर 2019 को समाप्त हुई. उम्मीद है कि एक महीने के अंदर इस मामले पर फैसला लिख दिया जाएगा. इस तरह बहुचर्चित और विवादित राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद पर अंतिम दलील रखी जा चुकी है. 40 दिनों की सुनवाई के साथ ही यह देश का दूसरा मुकदमा बन गया जिसकी सुनवाई सबसे लंबे समय तक चली. 

तीसरा केस: आधार की संवैधानिकता को चुनौती
2018 में केंद्र सरकार द्वारा आधार को बैंक अकाउंट से लिंक कराने की अनिवार्यता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. आधार की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने सुनवाई की. बेंच ने आधार मामले में फैसला आने तक सरकारी सेवाओं में इसकी अनिवार्यता पर रोक लगा दी थी. 10 मई को हुई इस मामले की अंतिम सुनवाई के दिन अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने बताया कि यह देश के इतिहास की दूसरी सबसे लंबी चली सुनवाई है. इस केस की सुनवाई 38 दिनों तक चली थई. हालांकि अब आधार केस तीसरे नंबर पर चला गया है. दूसरे नंबर पर अयोध्या राम जन्मभूमि बाबरी विवाद केस की सुनवाई है जो 40 दिनों तक चली.

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