नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जज जस्टिस चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन लोकुर और कुरियन जोसफ ने आज मीडिया को संबोधित करके सुप्रीम कोर्ट प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं. जस्टिस जे. चलेमेश्वर ने कहा कि हम चारों मीडिया का शुक्रिया अदा करना चाहते हैं. यह किसी भी देश के इतिहास में अभूतपूर्व घटना है क्‍योंकि हमें यह ब्रीफिंग करने के लिए मजबूर होना पड़ा है. उन्‍होंने कहा कि SC में बहुत कुछ ऐसा हुआ, जो नहीं होना चाहिए था. वहीं इस मामले को लेकर पीएम मोदी ने कानूनी मंत्री रविशंकर प्रसाद के साथ आपातकालीन बैठक बुलाई है.

सुप्रीम कोर्ट के जजों ने कहा कि हमारे पास मीडिया के सामने आने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा था. मुख्य न्यायधीश पर देश को फैसला करना है. सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन सही तरीके से काम नहीं कर रहा, चीफ जस्टिस से कई गड़बड़ियों को लेकर शिकायत की है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार आज मीडिया से बात कर रहे हैं. ये चार जज आज चीफ जस्टिस से मिले थे और उनका विरोध केसों को देने का है. ये प्रेस कॉन्‍फ्रेंस जस्टिस जे चेलामेश्वर के घर पर हो रही है. 

मीडिया से बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट में नंबर दो के जज माने जाने वाले जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा, ‘करीब दो महीने पहले हम 4 जजों ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा और मुलाकात की. जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि ज्यूडिशियरी में ये एक्सट्रा ओडिनेरी इवेंट है, हमें पेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कोई खुशी नहीं हो रही है. पिछले दो महीने में जो हुआ है उसको लेकर पीसी कर रहे हैं, हम चीफ जस्टिस से बातें कर रहे थे लेकिन वार्ता सफल नहीं हुई थी. 

हमने उनसे बताया कि जो कुछ भी हो रहा है, वह सही नहीं है. वहीं जस्टिस गोगोई ने कहा कि हमने जो मुद्दा उठाया उस पर कार्रवाई हो. जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि डेमोक्रेटिसी को रहने के लिए उसका सुरक्षित रहना जरूरी है, एक इशू को लेकर चीफ जस्टिस से भी मिले. ऐसे में हमारे पास कोई विकल्प नहीं था.

जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि कुछ महीने पहले हम चारों से हस्ताक्षर सहित एक लैटर CJI को दिया था. उन्होंने कहा कि ये काम इस तरह से किया जाए,ताकि संस्थान पर कोई ऊंगली न उठे. आज सुबह हम चारों चीफ जस्टिस से मिले और कहा ये काम सही नहीं हो रहा है. जस्टिस रंजन गोगाई ने कहा कि हम आपको पत्र देंगे आप उसे देखे, ये एक केस को अस्सिगमेंट को लेकर था.

उन्‍होंने मीडिया से कहा, हमने किसी काम को सही तरीके से करने के लिए कहा था. कुछ महीने पहले हम चारों जजों ने चीफ जस्टिस को एक चिट्ठी लिखी थी. हमारी कोशिशें नाकामयाब रहीं. जब कोई विकल्‍प नहीं बचा तो हम आपके सामने आए हैं. देश का लोकतंत्र खतरे में है.

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