नई दिल्ली: आज सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सासंदों को आजीवन पेंशन और भत्ता देने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे खारिज कर दिया है. उच्चतम न्यायालय के इस फैसले से सांसदों को बड़ी राहत मिली है. गौरतलब है कि 7 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. केवल इतना ही नहीं, अदालत का ये भी कहना है कि लोकतंत्र में ऐसा नहीं होता कि कोर्ट नीतिगत मुद्दों पर फैसला दे.

इससे पहले पूर्व सांसदों को आजीवन पेंशन दिए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार, चुनाव आयोग और लोकसभा-राज्यसभा के महासचिव को नोटिस जारी किया था. लोकप्रहरी ने याचिका दाखिल कर कहा कि सांसद कैसे खुद का वेतन और भत्ता तय कर सकते हैं. इसके लिए स्थाई आयोग होना चाहिए, वहीं पूर्व सासंदों और विधायकों को आजीवन पेंशन दी जा रही है, जबकि नियमों में यह शामिल नहीं है. अदालत ने कहा कि लोकतंत्र में कानून निर्माताओं के रूप में सांसदों को कुछ अधिकार और विशेषाधिकार एवं सुविधा प्राप्त हैं. केंद्र सरकार की ओर से पेश अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अदालत में पूर्व सांसदों को आजीवन पेंशन और अलाउंस दिए जाने का समर्थन किया है.

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