नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को लालू यादव के बेटे और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव की याचिका खारिज करते हुए उन्हें सरकारी बंगला खाली करने का आदेश दिया है. तेजस्वी को यह बंगला तब मिला था, जब वह बिहार के उपमुख्यमंत्री थे. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने तेजस्वी यादव पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया. तेजस्वी यादव ने पटना हाई कोर्ट के बंगला खाली करने आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. 7 जनवरी को पटना हाई कोर्ट ने तेजस्वी यादव के 5 देशरत्न मार्ग सरकारी बंगला खाली करने के नीतीश कुमार सरकार के आदेश को सही ठहराते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी थी.

पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एपी शाही और जस्टिस अंजना मिश्रा की बेंच ने कोर्ट की एक जज वाली बेंच का फैसले को सही ठहराते हुए तेजस्वी को बंगला खाली करने का आदेश दिया था. अक्टूबर में जस्टिस ज्योति शरण की सिंगल बेंच ने नीतीश सरकार की उस दलील को सही बताया था, जिसमें तेजस्वी से बंगला खाली करने को कहा गया था. डिप्टी सीएम के पद से हटने के बाद राज्य सरकार ने यह बंगला उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को आवंटित कर दिया है.

इससे पहले दिसंबर में तेजस्वी का बंगला खाली कराने पहुंची अफसरों और पुलिस की टीम को भारी विरोध का सामना करना पड़ा था. बाद में तेजस्वी के वकील द्वारा अदालत के कागजात दिखाने के बाद टीम बिना बंगला खाली कराए वापस लौट गई थी. इसे लेकर तेजस्वी ने सीएम नीतीश पर हमला बोलते हुए पूछा था कि कानून अपना काम करेगा, फिर आप इतने व्याकुल क्यों हैं? तेजस्वी ने कहा था कि नीतीश कुमार कुछ भी कर सकते हैं. उनके पास दिल्ली से लेकर पटना में कई घर हैं. पहले वह खुद मकान खाली करें.

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