नई दिल्लीः चुनावी साल में मोदी सरकार जनता को लुभाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है. गरीब सवर्णों को 10 पर्सेंट आरक्षण देने के चुनावी मास्टरस्ट्रोक के बाद अब नरेंद्र मोदी सरकार आरक्षण में अति पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की हिस्सेदारी को नए शिरे से तय करने यानी ओबीसी कोटे के अंदर कोटे पर विचार कर रही है. इसके लिए सरकार ने बीते दिनों सभी मंत्रालयों को निर्देश दिए थे कि वे अपने यहां काम करने वाले ओबीसी कर्मचारियों की संख्या और उनकी जाति के डेटा उपलब्ध कराएं. डेटा उपलब्ध कराने की आखिरी तारीख शुक्रवार 18 जनवरी की थी.

डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) ने बीते 12 जनवरी को मंत्रालयों को निर्देश दिया था. सूत्रों के मुताबिक, मोदी सरकार संसद के आखिरी सत्र में ओबीसी कमिशन की रिपोर्ट पटल पर रख सकती है. संसद का बजट सत्र 31 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा. मालूम हो कि हाई कोर्ट की पूर्व जज जी. रुक्मिणी की अध्यक्षता वाला आयोग ओबीसी के कोटे के अंदर कोटे की संभावनाओं पर विचार कर रहा है.

हालांकि, इसे लेकर पहले ही विरोध शुरू हो गया था. इसके बाद मोदी सरकार ने संकेत दिया था कि वह ओबीसी को अलग-अलग वर्गों में बांटने की पहल पर फिलहाल कोई फैसला नहीं लेगी. लेकिन बीते दिनों आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने की मांग के बाद ओबीसी के विभिन्न वर्गों द्वारा आरक्षण की मांग गूंजने लगी है, जिसके बाद मोदी सरकार ने इसपर पहल की है. इस मामले में गठित आयोग को रिपोर्ट पेश करने के लिए 6 महीने का विस्तार दिया गया है और आयोग के पास 31 मई 2109 तक का समय है.

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