नई दिल्ली: श्रीलंका में सोमवार को सरकार समर्थकों और विरोधियों के बीच हुई झड़प में राजपक्षे बंधुओं की सत्तारूढ़ पार्टी के एक सांसद और दो अन्य लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि पोलोन्नारूआ जिले से श्रीलंका पोदुजना पेरामुना (एसएलपीपी)
के सांसद अमरकीर्ति अतुकोरोला को सरकार विरोधी समूह ने पश्चिमी शहर नितम्बुवा में घेर लिया था। वही लोगों का दावा है कि सांसद की कार से गोली चली थी और जब आक्रोशित भीड़ ने उन्हें कार से उतारा तो उन्होंने भागकर एक इमारत में शरण ली।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सांसद ने स्वयं अपनी रिवॉल्वर से गोली मारकर आत्महत्या कर ली।

पुलिस ने बताया कि इमारत को हजारों लोगों ने घेर रखा था और बाद में सांसद और उनका निजी सुरक्षा अधिकारी मृत मिला। स्थानीय मीडिया एजेंसी के मुताबिक गोलीबारी में 27 वर्षीय एक अन्य व्यक्ति की भी मौत हुई है। इस बीच कोलंबो, में गोटागोगामा और मैनागोगामा प्रदर्शन स्थल पर हुए हिंसक हमले के बाद श्रीलंका में कानून व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण से बाहर चली गई है। एसएलपीपी पार्टी के नेताओं के स्वामित्व वाली संपत्तियों पर हमले हो रहे हैं. आक्रोशित भीड़ ने पूर्व मंत्री जॉनसन फर्नांडो के कुरुनेगाला और कोलंबो स्थित कार्यालय पर हमला किया है। जानकारी के मुताबिक कुछ लोगों ने उनके बार को भी आग के हवाले कर दिया है।

पूर्व मंत्री निमल लांजा के घर पर हमला

पूर्व मंत्री निमल लांजा के आवास पर भी हमला किया गया है जबकि महापौर समनलाल फर्नाडो के आवास में आग लगा दी गई। सत्तारूढ़ पार्टी के मजदूर नेता महिंदा के कोलंबो स्थित आवास पर ही हमला हुआ है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के समर्थकों द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हमला किए जाने के बाद पूरे देश में हिंसा भड़क गई है। लोगों ने राजधानी से लौट रहे राजपक्षो समर्थकों पर गुस्सा उतारा। उन्होंने उनके वाहनों को रोक लिया और कई शहरों में उन पर हमला किया। कहा यह भी जा रहा है कि भीड़ ने राजपक्षे का पुश्तैनी घर भी फूंक दिया है

ब्रिटैन से आजादी मिलने के बाद श्रीलंका का सबसे बुरा वक़्त

इस हमले में कम से कम 174 लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद राष्ट्रव्यापी कर्फ्यू लगा दिया गया है और राजधानी में सेना तैनात कर दी गई है। बता दें कि ब्रिटेन से वर्ष 1940 में आजादी मिलने के बाद से अब तक के समय में श्रीलंका अपने सबसे बुरे आर्थिक दौर से गुजर रहा है। यह संकट विदेशी मुद्रा भंडार की कमी से उत्पन्न हुआ है, जिसका अभिप्राय है कि देश खाद्यान, ईंधन के आयात के लिए भुगतान नहीं कर सकता।

 

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