नई दिल्ली. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कार्यक्रम के दौरान श्याम राव शिर्के नाम के एक ऐसे शख्स की तारीफ की थी जिसने बड़े ही देसी स्टाइल में एक ऐसा उपकरण तैयार किया है, जो नालों से निकलने वाली मीथेन गैस को रसोई गैस की तर्ज पर उपयोग करने में मदद करता है. इस बात को लेकर सोशल मीडिया पर पीएम मोदी का खूब मजाक उड़ाया जा रहा है. ऐसे में छत्तीसगढ़ के रायपुर के रहने वाले वह शख्स श्याम राव शिर्के खुद सामने आ गए हैं. मिली जानकारी के अनुसार, शिर्के ने अपने प्रोजेक्ट का ग्लोबल पेटेंट भी कराया है. खबर है कि शिर्के के इस प्रोजेक्ट को रायपुर के कुछ चुनिंदा नालों और नालियों में स्थापित किया जाएगा.  

गौरतलब है कि शिर्के की इस मशीन को प्लास्टिक के तीन ड्रमों और कंटेनर को आपस में जोड़कर बनाया गया है. इन कंटेनरों में एक वॉल्व लगा दिया जाता है.  इन कंटेनरों को नदी, नाले के ऊपर उस स्थान पर रखा जाता है, जहां से बदबूदार पानी गुजरता है. ऐसे में गंदगी उस कंटेनर में समा ना जाए इसके लिए नीचे की ओर एक जाली लगाई जाती है.

मशीन को इस तरह से फिट कर दिया जाता है जिससे ड्रम में इकट्ठी हुई गैस पर प्रेशर बने. नाला या नदी जितनी गहरी होगी गैस भी उसी अनुसार बनेगी. शिर्के की मानें तो उन्होंने चार माह तक एक दर्जन से ज्यादा व्यक्तियों का सुबह का नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन इसी उपकरण की मदद से बनाया है. इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने अपनी तैयारी भी शुरू कर दी है.

मैकेनिकल कॉन्ट्रैक्टरशिप पर अपनी आजीविका चलाने वाले शिर्के सिर्फ 11वीं पास हैं. शिर्के अब भी हर रोज कोई ना कोई ऐसा उपकरण तैयार करते रहते हैं. शिर्के के इसी आविष्कार से प्रभावित होकर पीएम मोदी भी उनकी तारीफ कर चुके हैं.

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