नई दिल्ली: महाराष्ट्र की राजनीति में जनता को क्या-क्या देखने को नहीं मिला. एक तरफ बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस ने 23 नवंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी लेकिन महज 80 घंटे में ही उन्होंने मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा दे दिया है. इसके बाद महाराष्ट्र में एक बार फिर से मुख्यमंत्री पद की कुर्सी खाली हो गई थी जिसे अब शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे संभालेंगे. आज शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस गठबंधन से महाराष्ट्र में सरकार बनाई जाएगी. बताया जा रहा है शपथग्रहण समारोह में सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह, कैप्टन अमरिंदर सिंह, अखिलेश यादव और केजरीवाल भी शामिल हो सकते हैं.

महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए पहले दोस्ती टूटी तो फिर परिवार. सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर कई मीम और चुटकुले देखने को मिले. देवेंद्र फडणवीस के इस्तीफा देने के बाद कुछ लोग कहने रहे हैं कि बीते शनिवार अखबार में छपी खबर आज के लिए मान्य होगी.

दरअसल बीते शनिवार सभी प्रिंट मीडिया में ये खबर छप चुकी थी कि, महाराष्ट्र में शिवसेना की सरकार बनने जा रही है. लेकिन अचानक शनिवार और रविवार की दरमियानी रात ही महाराष्ट्र से राष्टपति शासन हटा लिया गया और इसेक बाद फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली. बता दें कि भारतीय जनता पार्टी ने हाल ही में हुए महाराष्ट्र चुनाव में 105 सीटें जीती थी. इसके बाद उन्होंने अजित पवार  के साथ मिलकर महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार बनाई थी लेकिन ये सरकार 80 घंटे से ज्यादा समय तक नहीं चल सकी और फडणवीस ने अपना इस्तीफा दे दिया था.लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है जब भारत में 80 घंटे में ही कोई सरकार गिर गई हो. बल्कि ऐसे कई नेता हैं, जिनकों मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद ही कुर्सी को टाटा बाय-बाय कहना पड़ा. आइये जानते हैं इससे पहले किसने कितने घंटे संभाली मुख्यमंत्री पद की कुर्सी.

1. उत्तर प्रदेश के जगदंबिका पाल-अब तक सबसे कम समय के लिए मुख्यमंत्री बनने वाले में उत्तर प्रदेश के नेता जगदंबिका पाल है. उन्होंने साल 1988 में 21 फरवरी को मुख्यमंत्रा की शपथ ली लेकिन दूसरे दिन ही मामला हाईकोर्ट में पहुंचा. इसके बाद जगदंबिका पाल बहुमत साबित नहीं कर पाए और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. इसलिए उन्हें वन डे वंडर ऑफ इंडियन पॉलिटिक्स कहा जाता है. वर्तमान में जगदंबिका पाल भारतीय जनता पार्टी में है वे काफी लंबे समय तक कांग्रेस में भी रहे थे.

2. कर्नाटक के बीएस येदियुरप्पा-महाराष्ट्र की तरह ही एक बार कर्नाटक में भी मुख्मंत्री की कुर्सी के लिए काफी घमासाम देखने को मिला था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद येदियुरप्पा भी सदन में अपना बहुमत साबित नहीं कर पाए थे और उन्होंने भावुक भाषण के साथ मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा दिया था. उन्हें जगदंबिका पाल के बाद सबसे कम द‍िन का सीएम बनने वाला नेता कहा जाता है.

3..झारखंड के झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन-साल 2005 में झारखंड में भी झामुमो और बीजेपी की सरकार बनाने को लेकर घमासान हुए थे. उस वक्त राज्यपाल ने 2 फरवरी 2005 को झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन को सरकार बनाने के लिए निमंत्रित कर दिया हालांकि शिबू सोरेन के पास प्याप्त मत नहीं थे. इसलिए बहुमत के लिए जादुई आकंडा नहीं होने के कारण उन्होंने फ्लोर टेस्ट से पहले ही अपना इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद जदयू और निर्दलीय विधायकों की मदद से वहां दोबारा भारतीय जनता पार्टी के अर्जुन मुंडा ने अपनी सरकार बनाई.

 4.बिहार के सतीश प्रसाद सिंह-बिहार राज्य के नेता सतीश प्रसाद सिंह 28 जनवरी 1968 में बिहार के मुख्यमंत्री बने थे. लेकिन सीएम बनने के पांच दिन बाद ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. वे बिहार के पहले पिछड़ी जाति के नेता थे.

5. तमिलनाडु की जानकी रामचंद्रन-तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन का निधन 24 दिसंबर 1987 को हुआ. इसके बाद उनकी पत्नी को उनका उत्तरदायित्व सौंपने को लेकर पार्टी एक जुट हो गई. इसके अलावा दूसरा पक्ष जयललिता के पक्ष में था. इसके बाद राज्‍यपाल एसएल खुराना ने 7 जनवरी को एमजी रामचंद्रन की पत्नी को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई. लेकिन वह सदन में अपना बहुमत साबित नहीं कर पाईं और 28 जनवरी को उन्हें पद छोड़ना पड़ा.  

6. मेघालय के एससी मारक -मेघालय में भी बहुमत साबित ना करने को लेकर कुछ महाराष्ट्र जैसी ही स्थिति देखने को मिली थी. नेता एस सी मारक ने 27 फरवरी 1998 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और 3 मार्च 1998 को उन्हें बहुमत साबित नहीं करने के लिए अपना इस्तीफा देना पड़ा. वे सिर्फ 6 दिन के सीएम बने थे.

 

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