मुंबई. सुप्रीम कोर्ट आज शिवसेना ी याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमें कहा गया है कि कांग्रेस और एनसीपी से पहले सरकार बनाने के लिए आवश्यक समर्थन पत्र प्रस्तुत करने के लिए उनकी पार्टी को अधिक समय देने से इनकार किया गया. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के इनकार करने पर उनके खिलाफ शिवसेना ने याचिका दर्ज करवाई है जिसपर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा. शिवसेना ने राज्यपाल के सोमवार के फैसले को असंवैधानिक, अनुचित और दुर्भावनापूर्ण करार दिया है. सुनवाई से पहले, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, हालांकि, महाराष्ट्र में अभी तक विधायकों की अवैध खरीद शुरू नहीं हुई है, लेकिन राष्ट्रपति शासन उस दिशा में एक कदम है. शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में कहा कि राज्यपाल के कुछ स्वतंत्र सोच दिखाने की उम्मीद थी.

उन्होंने कहा कि उन्हें शिवसेना की उस दिशा की आलोचना करते हैं, जिसमें हम जा रहे हैं. जब वे महबूबा मुफ्ती और नीतीश कुमार के साथ गए तो क्या हुआ? हमने भगवान शंकर ‘नीलकंठ’ की तरह विष को पचा लिया है. अगर वे अपने वादे से जीते, तो हम यह कदम नहीं उठाते. लेकिन वे हमें हमारा हक देने के बजाय विपक्ष में बैठना चाहेंगे. राज्य अब लगभग तीन सप्ताह से राजनीतिक अनिश्चितता का सामना कर रहा है. वहां राष्ट्रपति शासन लागू होने के कुछ घंटे बाद, उद्धव ठाकरे ने मंगलवार शाम कहा, महाराष्ट्र में सरकार के लिए कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और उनकी पार्टी गठन के लिए एक सूत्र का काम करेगी.

24 अक्टूबर को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से, शिवसेना कांग्रेस-एनसीपी के संपर्क में थी, इस दावे पर भाजपा पर हमला करते हुए, ठाकरे ने कहा कि उन्होंने अपने खराब समय में एनडीए के साथ गठबंधन किया था. उन्होंने उपनगरीय रिसॉर्ट में शिवसेना के विधायक-चुनाव के बाद मुलाकात के बाद कहा, मैंने आधिकारिक तौर पर कल (11 नवंबर) को कांग्रेस-राकांपा से बात की, सरकार बनाने के लिए समर्थन मांगा. हम उसी के लिए एक सूत्र तैयार करेंगे. ठाकरे ने कहा कि यदि कांग्रेस और एनसीपी की तरह ही कांग्रेस को भी उनके समर्थन से सरकार बनानी है तो कॉमन मिनिमम प्रोग्राम (सीएमपी) पर स्पष्टता चाहिए.

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