नई दिल्ली. दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित दिल्ली कांग्रेस की नई अध्यक्ष होंगी. 4 जनवरी को अजय माकन के इस्तीफा देने के बाद यह पद खाली हो गया था. उन्होंने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए पद छोड़ने की बात कही थी. वह दर्दनाक ऑर्थोपेडिक बीमारी से जूझ रहे हैं. इससे पहले खबर आई थी कि अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी से गठबंधन को लेकर उनकी पार्टी आलाकमान से मतभेद चल रहे हैं. लेकिन माकन ने इसे खारिज कर दिया. उनके इस्तीफे के बाद पद की रेस में शीला का नाम सबसे आगे चल रहा था. वहीं प्रह्लाद सिंह साहनी, अरविंदर सिंह लवली, योगानंद शास्त्री और महाबल मिश्र भी दौड़ में चल रहे थे.

लेकिन अंत में मुहर शीला दीक्षित पर लगी. चूंकि 15 साल शीला दीक्षित मुख्यमंत्री रह चुकी हैं लिहाजा किसी ने भी उनके नाम पर आपत्ति नहीं उठाई. कांग्रेस आलाकमान ने लोकसभा चुनावों को देखते हुए राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की तर्ज पर युवाओं से ज्यादा शीला दीक्षित जैसी अनुभवी नेता को तरजीह दी. लेकिन शीला की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए कांग्रेस चीफ राहुल गांधी अन्य नेताओं को भी बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकते हैं.

इससे पहले एक इंटरव्यू में शीला दीक्षित ने कहा था कि वह दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी देने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा था, अगर आलाकमान मुझे यह जिम्मेदारी देता है तो कोई आपत्ति नहीं. शीला दीक्षित के सामने दिल्ली में कांग्रेस को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में मनोबल फूंकने की जिम्मेदारी होगी. 2019 लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी से कांग्रेस गठबंधन करेगी या नहीं इस पर उन्होंने कुछ दिनों पहले बयान में कहा था कि इस पर फैसला पार्टी आलाकमान लेगी.

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