नई दिल्ली: सुशांत सिंह राजपूत की मौत किन हालातों में हुई, ये सवाल उस चौराहे पर खड़ा है जहां से कई जवाब निकलते हैं. कोई कह रहा है सुशांत डिप्रेशन में थे, कोई लव एंगल निकाल रहे हैं तो कोई कह रहा है नेपोटिज्म का शिकार हो गए. जितने मुंह उतनी बातें लेकिन सच्चाई ये है कि सुशांत की मौत के साथ ही दफ्न हो गए उन सवालों के जवाब जो सुशांत की मौत की असली वजह सामने ला सकते थे.

सुशांत की मौत से यूं तो पूरा बॉलीवुड गमगीन है लेकिन इन सबमें से कोई एक है जिसे सुशांत के जाने से जबर्रदस्त सदमा लगा है और वो हैं इंटरनेशनल फिल्म डायरेक्टर शेखर कपूर जो सुशांत सिंह राजपूत के साथ एक फिल्म करना चाहते थे जिसका टाइटल था पानी.. सुशांत सिंह राजपूत को लेकर उन्होंने फिल्म अभिनेता मनोज वाजपेयी के साथ इंस्टाग्राम पर वीडियो चैट किया. उनकी बातचीत का अंश हम आपको पढ़वा रहे हैं.

शेखर कपूर मुझे लगता है हमारे भीतर का कुछ हिस्सा ऐसा है जिसे ड्रामा पसंद है. हम मूवी बिजनेस में हैं और ऐसे किसी भी बिजनेस में जहां हाई प्रोफाइल लोग शामिल होते हैं वहां लोग ड्रामा ढूढ़ने की कोशिश करते हैं. आज जिस दौर में हम जी रहे हैं वहां हर कोई यही बात कर रहा है… मैं उम्मीद करता हूं कि हर चीज को ड्रामेटाइज करने का ये चलन जल्द खत्म हो…

  • हम लोगों का ध्यान अल्पकालिक है, सोशल मीडिया ने हमें ऐसा ही बनाया है. वो दिन चले गए जब दिमाग शांत हो जाता था लेकिन लगता है सुशांत के मामले में जब दिमाग शांत होगा तो हम सुशांत की फिल्में देखेंगे और बार-बार देखेंगे और ये समझने की कोशिश करेंगे कि वो उसने हमें किया दिया.
  • फिल्म पानी के प्रोजेक्ट पर सुशांत के साथ काम करने के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि जब वो पहली बार सुशांत सिंह राजपूत से मिले तो उन्हें लगा कि वो एक बच्चे से मिल रहे हैं.

शेखर कपूर  ने कहा महीनों की तैयारी के बाद फिल्म के प्रोड्यूसर यशराज फिल्म्स ने प्रोजेक्ट बंद कर दिया. वो बच्चों की तरह उछल रहा था कि उसे मेरे साथ काम करने का मौका मिलेगा. सुशांत के बारे में सबसे अच्छी बात जो मैने नोटिस की वो ये कि रिहर्सल की लाइन या स्क्रिप्ट पढ़ने के साथ ही उसकी एक्टिंग बंद नहीं हो जाती थी. उसकी दिलचस्पी उससे कहीं ज्यादा थी…

जब भी मैं पानी के लिए प्रोडक्शन डिजाइनर या डीओपी या वीएफएक्स टीम से मिलता, सुशांत उस मीटिंग में जरूर मौजूद होता. सुशांत फिल्म पानी के कैरेक्टर गोरा में पूरी तरह डूब चुका था. वो कई बार रात 2 बजे 3 बजे फोन करता और फिल्म से जुड़ी छोटी से छोटी डिटेल्स मुझसे डिस्कस करता. पानी जैसे उसके लिए नशा बन गई थी.

तीन महीनों की तैयारी के बाद मुझे सुशांत से जैसे प्यार हो गया था. जब उसे पता चला कि पानी का प्रोजेक्ट बंद किया जा रहा है तो उसका दिल टूट सा गया…

… जब फिल्म बंद हो गई और उसे ये एहसास हुआ कि वो फिल्म नहीं कर रहा है तो वो बहुत रोया.. मैं भी रोया.. वो रोता था तो मैं भी रोता था साथ-साथ क्योंकि मैं भी इस प्रोजेक्ट में भीतर तक शामिल हो गया था.

हमारी जिंदगियां ही कुछ ऐसी होती है. उतार और चढ़ाव.. और ये जो लफ़्ज हैं डिप्रेशन… ऐसा नहीं है कि मैं कह रहा हूं कि डिप्रेशन नहीं होता, मैं ऐसा कह रहा हूं कि ड्रिप्रेशन एक लफ़्ज है जिसके साथ हम खेल लेते हैं. क्योंकि हम क्रिएटिव लोग हैं इसलिए हम भावनाओं के साथ खेल लेते हैं.

बैंडेड क्वीन की मेकिंग के दौरान मैं कमरे में जाकर जोर से चिल्लाता था ताकि अपने इमोशंस को बाहर निकाल सकूं और फिर एडिट देखता था.. शूट के दौरान मैं गुस्से में था, मैं एडिट देखते समय गुस्से में नहीं रहना चाहता था नहीं तो मैं कैसे जज कर पाता? हम ऐसी जिंदगियों को जीते हैं. हम खुद को झोंकते हैं. सुशांत हर छोटी से छोटी चीज में खुद को झोंकता था, उसके शरीर का हर अणु पूरी तरह उस प्रोजेक्ट में शामिल था. आप इससे इतनी जल्दी बाहर कैसे आ सकते हैं? आप आ ही नहीं सकते.

मनोज वाजपेयी- सुशांत सिंह राजपूत की मौत आपको कैसे परेशान कर रही है?

शेखर कपूर- परेशान तो वही चीज कर रही है जो मैने नहीं किया… पानी के प्रोड्यूसरों ने कहा कि हम नहीं बनाएंगे सुशांत के साथ.. पानी नहीं बनेगी…

कुछ और फिल्म कोशिश करके बना लेता, वो नहीं किया.. मैं बाहर चला गया हिंदुस्तान से, गुस्सा नाराज हो गया.. मुझे जो बात परेशान कर रही है वो ये कि मैने पिछले 6 महीने में सुशांत को फोन नहीं किया ना उससे मिलने गया.

शेखर कपूर ने कहा कि चाहे वो फिल्मों के बारे में बात ना करते लेकिन बहुत सी दूसरी चीजों के बारे में बात कर सकते थे, फिर चाहे वो क्वांटम फिजिक्स हो या कुछ और…

मनोज वाजपेयी ने पूछा कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत से लोगों में बहुत गुस्सा है वो क्यों?

शेखर कपूर- ये गुस्सा लोगों उस पहचान से आता है जो आप दुनिया को दिखा रहे हैं कि स्टार्डम जिसे हमें जैसा इमेजिन करते हैं दरअसल वो वैसी होती नहीं है… गुस्सा इसलिए आ रहा है कि बाकी लोगों को फिर क्यों नहीं चांस मिला..

आम आदमी सुशांत सिंह के अबतक के जीवन से खुद को जोड़कर देख रहा है… मनोज वाजपेयी- कहीं ना कहीं जो गुस्सा आम जनता को आ रहा है क्योंकि सुशांत में उनको एक ऐसा हीरो दिखता था जो उनके बीच से आया था.. अचानक उनको लग रहा है कि उनका प्रतिनिधित्व करता था, जो उनको कहीं ना कहीं एक उम्मीद दे रहा था कि उनके बीच का एक लड़का जो इतनी दूर जाता है तो उनके लिए भी उम्मीद है… अचानक उन लोगों ने अपना प्रतिनिधि खो दिया. सुशांत ने लोगों को उम्मीद दी थी कि अगर वो वहां तक पहुंच सकता है तो दूसरे भी पहुंच सकते हैं..

मनोज वाजपेयी- सुशांत का अचानक इस तरह चले जाने से कहीं ना कहीं वो टूट गए हैं. गुस्सा कहीं ना कहीं अपनी भावनाओं को जताने का एक तरीका है, खोने का दुख जाहिर करना एक तरीका है.

यहां सुनिए शेखर कपूर और मनोज वाजपेयी का  पूरा इंटरव्यू

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