नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में धारा 377 पर आज की बहस खत्म हो गई है. इस मामले पर गुरुवार को लगातार तीसरे दिन बहस जारी रहेगी. इससे पहले बुधवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की नेतृत्व वाली संवैधानिक बेंच में जस्टिस आर एफ नरीमन, जस्टिस एम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चन्द्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने बहस के दूसरे दिन इस मामले पर सुनवाई की. वहीं केंद्र सरकार ने समलैंगिकता पर फैसला पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ दिया है. वहीं क्यूरेटिव पिटिशन पर चल रही सुनवाई में दोनों पक्षों की तरफ से जोरदार दलीलें पेश की जा रही हैं. केंद्र सरकार की ओर से पेश एएसजी तुषार मेहता ने सरकार की तरफ से जारी ऐफिडेविट पेश करके फैसला कोर्ट पर छोड़ दिया है.

Section 377 hearing LIVE updates:

– धारा 377 पर बुधवार की बहस खत्म हो गई है. संवैधानिक बेंच उठ गई है. अब लगातार तीसरे दिन गुरुवार को इस मामले बहस जारी रहेगी.

– वहीं मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि धारा 377 सेक्सुअल अल्पसंख्यकों के सोशल औऱ राजनीतिक अधिकारों का हनन करता है. मेनका ने कहा कि मौजूदा कानून उनकी जिंदगी को परेशान करता है और वो मान्यता चाहते हैं . वो लोग देश मे नैतिक, सामाजिक व राजनीतिक नागरिकता चाहते हैं. ये केस नैतिकता को बदलने के लिए है. इसकी के साथ मेनका ने बहस पूरी की.

– मामले पर बहस करते हुए मेनका ने कहा कि धारा 377 आस्तित्व में नहीं रह सकती क्योंकि ये नैतिकता के खिलाफ है. मेनका ने कहा कि यहां तक की नोटरी ने याचिकाकर्ता के हलफनामे पर साइन करने से इंकार कक दिया था. उसने विशाखापट्टनम से साइन कराए गए है, जिसके जवाब में चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर हमें बताया गया होता तो यहां से साइन करा दिए होते. 

– मामले पर बोलते हुए जस्टिस चंद्रचूड ने कहा कि हम ये नहीं चाहते कि दो समलैंगिक मेरीम ड्राइव पर वॉक कर रहे हों और पुलिस उन्हें परेशान करे व मुकदमा करे. ये धारा लिंग आधार पर भेदभाव, समानता के आधार पर, स्वतंत्रता के अधिकार और गरिमापूर्ण जीने के अधिकार का हनन करती है.  उन्होंने कहा कि हम ये बहस कर रहे हैं कि क्या इस खास तरीके को जीने के अधिकार में शामिल कर सकते हैं

– इससे पहले एसीजी तुषार मेहता सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए. उन्होंने कहा कि उनका हलफनामा सिर्फ इस मुद्दे तक सीमित है कि 377 असंवैधानिक है या नहीं. अगर कोर्ट इससे बढकर अन्य मुद्दों जैसे समलैंगिक शादी जैसों पर विचार करता है तो फिर दूसरा विस्तृत हलफनामा दाखिल करेंगे. इससे पहले मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि धारा 377 अंग्रेजों के जमाने का भयावह कानून है. जिससका LGBT समुदाय पर गहरा असर पड़ता है.

– केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि इसका हलफनामा केवल इस सवाल तक ही सीमित है कि धारा 377 आईपीसी संवैधानिक है या नहीं. अगर अदालत समान सैक्स विवाह इत्यादि जैसे अन्य मुद्दों पर जाती है, तो हम दूसरा विस्तृत हलफनामा दायर करेंगे.

– एसीजी तुषार मेहता ने कहा कि कोर्ट को सिर्फ इस बात पर ही विचार करना चाहिए कि क्या 377 को अपराधीकरण से बाहर करने की जरूरत है. इस मुद्दे के अलावा बडे मुद्दों पर भी विचार होगा तो इसके दूरदामी परिणाम होंगे.

– जस्टिस चंद्रचूड बोले हम यहां सेक्स की धारणाओं लिए नहीं बैठे हैं. हम यहां दो बालिगों द्वारा सहमति से खास प्रकार के सेक्स पर बहस करने के लिए बैठे हैं.

– इससे पहले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा ने कहा था कि सहमति से बालिग द्वारा किया गया अप्राकृतिक सेक्स अपराध के दायरे में नहीं आना चाहिए. 

– तुषार मेहता ने कहा कि जस्टिस चंद्रचूड के हदिया मामले के फैसले पर कहा कि पार्टनर चुनने का अधिकार है लेकिन ये खून के रिश्ते में नहीं हो सकता. हिंदू लॉ में इस पर प्रतिबंध है.

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