नई दिल्ली. अयोध्या राम जन्मभूमि जमीन विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में चौथे दिन शुक्रवार 9 अगस्त 2019 को भी सुनवाई हुई. पांचवें दिन की सुनवाई को लेकर मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन का कहना है कि अगर हफ्ते में 5 दिन सुनवाई होती है तो यह अमानवीय है और हम अदालत की सहायता नहीं कर पाएंगे. इसके साथ ही रामलला के वकील परासरण ने कहा कि राम जन्मभूमि विवाद एक अरसे से चला आ रहा है विवाद है अब इसका निपटारा होना चाहिए. दोनों पक्षों द्वारा पेश की गईं दलीलों से अभी तक कुछ निष्कर्ष नहीं निकला है.

रामलला के वकील परासरण ने अपनी दलील पेश करते हुए कहा पुरातत्व विभाग की खुदाई में जो सबूत मिले है उससे ये साफ़ पता चलता है कि वहाँ मस्ज़िद से पहले मंदिर था. वहीं लगाता चौथे दिन की सुनवाई को देखते हुए मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने काफी नाराजगी भी जताई उन्होंने कहा कि लगातार पांच दिनों से चल रही अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद की सुनवाई कोर्ट की परंपरा को तोड़ रही है.

ये है चौथे दिन की सुनवाई की पूरी टाइमलाइन

अयोध्या रामजन्म भूमि मामले की सुनवाई शुरू होते ही मुस्लिम पक्ष की तरफ से वरिष्ठ वक़ील राजीव धवन ने संविधान पीठ से अपनी आपत्ति दर्ज की.

मुस्लिम पक्ष की तरफ से वरिष्ठ वकील राजीव धवन

मैंने सुना है कि इस मामले की सुनवाई रोजाना होगी, सोमवार से शुक्रवार इस मामले में इस तरह सुनवाई नही होनी चाहिए. ये पहली अपील है अगर ऐसे जल्दी में सुनवाई होती है तो यह अमानवीय और हताशाजनक है अगर इस तरह मामले की सुनवाई होगी तो मैं केस की सुनवाई से हट जाऊंगा.

हिंदू पक्ष रामलला की तरफ से वरिष्ठ वकील के परासरण

हिन्दू पक्ष ने कहा ये न्याय का मंदिर है यहाँ रोज आते है यहाँ सरस्वती की पूजा करते है. कोर्ट को कोई ये नही बता सकता कि मामले की सुनवाई कैसे की जाए.

CJI जस्टिस रंजन गोगोई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपने जो आपत्ति जाहिर की है उसपर हम गौर करेंगे और बहुत जल्द आपकी आपत्ति पर आदेश जारी करेंगे.

हिंदू पक्ष रामलला की तरफ से वरिष्ठ वकील के परासरण

ईश्वर कण कण में है, लेकिन विभिन्न रूपों में उसका मानवीकरण कर पूजा होती है, मंत्र पूजा और मूर्ति तो ईश्वर की पूजा का माध्यम है. राम का अस्तित्व और उनकी पूजा यहां मूर्ति स्थापित होने और मन्दिर बनाए जाने से भी पहले से है. हिंदू दर्शन में ईश्वर किसी एक रूप में नहीं है. क्योंकि कहीं से अवतारों के रूप में है तो कहीं निराकार भी. अब केदारनाथ को ही लीजिए तो वहां कोई मूर्ति नहीं है लेकिन प्राकृतिक शिला है.

संविधान पीठ ने पूछा

कोर्ट ने पूछा एक देवता को न्यायिक व्यक्ति कैसे माना जा सकता है ?

रामलला के वकील के परासरण

परासर ने कहा देवता हर कण में है, उसके रूप की जरूरत नहीं. यहां तक कि पहाड़ों को देवताओं के रूप में पूजा जाता है, तिरुवनमलाई और चित्रकूट में परिक्रमा की जाती है.

जस्टिस अशोक भूषण

जस्टिस भूषण ने कहा सबूत हैं कि अयोध्या में जन्मस्थान के आसपास एक परिक्रमा होती है. क्या वह जन्मस्थान को कुछ पवित्रता प्रदान करेगा?

रामलला के वकील के परासरण

एक परीक्षित मार्ग है, जहाँ लोग परीक्षित होते थे, उसमें कोई प्रतिमा नहीं थी, इससे यह निष्कर्ष निकल सकता है कि परिक्रमा जन्म स्थान की होती थी. गोवर्धन में भी परिक्रमा होती है जो तीर्थयात्रा है. जब जन्मभूमि कि बात आती है तो पूरे स्थान को जन्मभूमि मानी जाती है. इसलिए पूरी अयोध्या को कहा जाता है, जब जन्मस्थान की बात आती है तो किसी चिन्हित जगह को कहते है. जब आप मंदिर जाते है तो आप उसे स्थल कहते है, उसे स्थान कहा जाता है वो जन्मभूमि नहीं होती. 1966 के एक फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि हिन्दू धर्म एक वे ऑफ लाइफ है यानी हिन्दू धर्म नहीं जीवन पद्धति है.

लंच के बाद की सुनवाई

रामलला के वकील के परासरण

रामायण में उल्लेख है कि सभी देवता भगवान विष्णु के पास गये और रावण के अंत करने की बात कही. तब विष्णु ने कहा कि इसके लिये उन्हें अवतार लेना होगा इस बारे में जन्मभूमि का वर्णन किया गया है और इसका महत्व है.

जस्टिस बोबड़े

जस्टिस बोबड़े ने का क्या इस समय रघुवंश डाइनेस्टी में कोई इस दुनिया में मौजूद है ?

परासरण

मुझे इस बारे में पता करना होगा. हिन्दू शास्त्र में जन्मस्थान कि महत्ता स्पष्ट है और हिन्दुओं से संबंधित कानून उसी शास्त्र पर आधारित हैं. मंदिर कि परिक्रमा के साथ पूरे परिसर कि परिक्रमा भगवान कि आराधना है. परिक्रमा के लिए एक स्थान तय करना होता है लेकिन राम जन्मभूमि मामले में ऐसा नही है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने अपने 2 अगस्त के आदेश में साफ कह दिया था कि मामले कि रोजाना होगी. हम इस मामले की सुनवाई सोमवार से शुक्रवार तक करेंगे. अगर मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन को उनकी अपील पर सुनवाई के दौरान अगर ब्रेक चाहिए होगा तो हम उस पर विचार करेंगे.

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