पटना: बिहार का सियासी उथल पुथल थमने का नाम नहीं ले रहा है. बीजेपी ने अपना वादा निभाते हुए नीतीश कुमार को सीएम तो बना दिया लेकिन एनडीए में दरार पड़ती हुई साफ नजर आ रही है. इस बीच अरुणाचल प्रदेश में जेडीयू के विधायक के बीजेपी में जाने से ये सियासी दरार और बड़ी नजर आने लगी है. राजनीति में किसी का नुकासान किसी का फायदा बन जाता है. ऐसा ही कुछ बिहार में देखने को मिल रहा है जहां आरजेडी ने सीएम नीतीश कुमार को ऑफर दिया है कि अगर नीतीश कुमार तेजस्वी यादव को सीएम बना देते हैं तो साल 2024 में विपक्ष उन्हें पीएम पद का दावेदार बना देगा. 

राजद के वरिष्ठ नेता और पू्र्व विधानसभा स्पीकर उदय नारायण चौधरी ने कहा है कि ‘अगर नीतीश कुमार तेजस्वी को मुख्यमंत्री बना दें तो उनको 2024 में प्रधानमंत्री के लिए विपक्षी पार्टियां समर्थन कर सकती हैं.’ यानी नीतीश कुमार के पास विपक्ष का खुला ऑफर है कि अगर वो सीएम पद तेजस्वी यादव को दे दें तो विपक्ष उन्हें 2024 में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बना देगा. देखना ये है कि नीतीश कुमार इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं. गौरतलब है कि 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में एनडीए को 125 सीटों पर जीत मिली है वहीं बात करें अकेले जेडीयू की तो उसे महज 43 सीटें ही मिली है. कम सीटों के बावजूद बीजेपी ने नीतीश कुमार को सीएम तो बनाया लेकिन दबदबा बीजेपी का ही कायम है.

बीजेपी अपनी जीती हुई सीटों के हिसाब से कैबिनेट में अपनी भागीदारी चाहती है जिसको लेकर जेडीयू और बीजेपी में खींचतान चल रही है. इससे पहले रविवार को जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश कुमार की मौजूदगी में आरसीपी सिंह को जेडीयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया. आरसीपी सिंह ने इस दौरान बीजेपी का नाम लिए बिना कहा कि जो लोग स्टाइक रेट की बात कर रहे हैं उन्हें याद दिला दूं कि साल 2010 में जेडीयू का स्ट्राइक रेट 90 फीसदी था. इतने अच्छे स्ट्राइक रेट के बावजूद नीतीश कुमार ने कहा था कि चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच जो तय हुआ है उसी आधार पर मंत्रीपद दिया जाएगा. 

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