नई दिल्लीः तेजस्वी की लखनऊ यात्रा का मकसद क्या है, यह सवाल सबकी जुबां पर है, लेकिन इसका कोई जवाब नहीं मिला. दरअसल, यूपी में सपा-बसपा ने गठबंधन कर लिया है और कांग्रेस को अलग-थलग छोड़ दिया है. वहीं बिहार में कांग्रेस लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के साथ है. ऐसे में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के यूपी आकर पहले बसपा सुप्रीमो मायावती और बाद में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिलने के बाद कयास लगाए जाने लगे कि कहीं आरजेडी किसी ऐसी कोशिश में तो नहीं है कि वह यूपी में सपा-बसपा के बीच हुए गठबंधन का फायदा बिहार में उठाना चाहती है या यूपी में पार्टी का विस्तार करना चाहती है. लेकिन अखिलेश यादव से साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने किसी भी सवालों का स्पष्ट तरीके से जवाब नहीं दिया. इससे यही लगा कि क्या तेजस्वी यादव सिर्फ मायावती और अखिलेश यादव के साथ फोटो खिंचवाने और सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए यूपी आए थे.

तेजस्वी यादव ने सोमवार सुबह मायावती से मुलाकात की और उनके पैर छू आशीर्वाद लेने की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की. बाद में वह अखिलेश यादव से भी मिले और उनके साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोला. उन्होंने यह भी कहा कि आरजेडी यूपी में सपा-बसपा गठबंधन का समर्थन करेगी. इसके बाद जब मीडिया ने उनसे सवाल किया कि आप यूपी में सपा-बसपा गठबंधन का समर्थन कर रहे हैं, जिन्होंने कांग्रेस पार्टी को अलग-थलग छोड़ दिया है और आप बिहार में कांग्रेस के साथ है, इसके क्या मायने हैं? इसपर तेजस्वी अगल-बगल झांकते दिखे और उन्होंने कहा कि वह बिहार है और यह यूपी, मैं यूपी की बात कर रहा हूं. इससे यह सवाल उठना लाजिम है कि क्या तेजस्वी यूपी में भी संभावनाएं तलाशने की फिराक में हैं या मायावती से मिलकर और उनसे आशीर्वाद लेने का फोटो शेयर कर बिहार में दलितों को साधने की कोशिश में हैं, जिनपर रामविलास पासवान की पार्टी लोजपा अपना हक जताती रही है.

वहीं, तेजस्वी के इस कदम से एक और बात सामने आ रही है कि क्या तेजस्वी बिहार में कांग्रेस के साथ कुछ खेल करने की फिराक में हैं? दरअसल, आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव के जेल जाने के बाद बिहार में कांग्रेस आरजेडी पर लगातार हमलावर है और सूत्रों की मानें तो बिहार की 40 सीटों में से कांग्रेस 15 सीटों की मांग कर रही है. कांग्रेस बिहार में बड़ी पार्टी है. हाल ही में वहां कांग्रेस, आरजेडी, जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी में महागठबंधन हुआ है. ऐसे में अगर 15 सीटें कांग्रेस ही मांगती है तो आरजेडी के सामने बाकी दलों और अपने लिए भी कितनी सीटों का विकल्प बचता है, यह वाकई देखने लायक है. यह बात भी सामने आ रही है कि कहीं बिहार में भी कांग्रेस की गठबंधन से छुट्टी न हो जाए. ऐसे में आरजेडी नेता तेजस्वी की अगली चाल पर सबकी नजर रहेगी.

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