नई दिल्ली. भारत में कोरोना से हुई मौतों का आंकड़ा रिपोर्ट हुए मामलों से 10 गुना ज्यादा हो सकता है। कोरोना मॉडर्न इंडिया के दौर की सबसे भयानक त्रासदी के तौर पर सामने आ सकता है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक की सबसे बड़ी रिसर्च रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। मंगलवार को रिलीज हुई इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कोरोना से 30 लाख से 49 लाख मौतें जून 2021 तक हो चुकी हैं।

इस रिपोर्ट को पब्लिश करने वालों में अर्थशास्त्री अरविंद सुब्रमण्यम भी शामिल हैं। सुब्रमण्यम भारत सरकार के पूर्व चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर रह चुके हैं। उनके अलावा दो और रिसर्चर इस शोध में शामिल थे। तीनों ने वॉशिंगटन बेस्ड सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर ये रिसर्च की है।

रिसर्च में कहा गया है कि 1947 में जब भारत का बंटवारा हुआ, उस वक्त करीब 10 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। जब देश में अलग-अलग हिंदू मुस्लिम दंगे हुए, लेकिन कोरोना आजाद भारत की सबसे जानलेवा त्रासदी साबित हुआ है।

भारत में हुई कोरोना से मौतों के लिए तीन कैलकुलेशन मैथड का इस्तेमाल किया है। इनमें जन्म और मौतों का रिकॉर्ड रखने वाले सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम का डेटा, भारत में वायरस के प्रसार को जानने के लिए हुए ब्लड टेस्ट और दुनियाभर में कोरोना से हो रही मौतों की दर के आधार पर और कंज्यूमर पिरामिड हाउसहोल्ड सर्वे (CPHS) का डेटा इस्तेमाल किया गया है।

रिसर्च करने वालों ने हर मैथड की कमियों को भी बताया है। जैसे- कंज्यूमर पिरामिड हाउसहोल्ड सर्वे में मौत के कारण का जिक्र नहीं होता है। जबकि रिसर्च करने वालों ने हर मौत के कारण का पता लगाने की कोशिश की।

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