नई दिल्ली: भारत में जल्द ही कोरोना की दवा उपलब्ध होगी. कैलिफोर्निया स्थित गिलियड ने 127 विकासशील देशों में रेमडेसिविर दवा उपलब्ध कराने के लिए कई जेनेरिक दवा निर्माताओं के साथ लाइसेंसिंग सौदों किए हैं. माइलन से पहले दो भारतीय दवा कंपनियां सिप्ला लिमिटेड और हेटेरो लैब्स लिमिटेड भी पिछले महीने इस दवा का जेनरिक वर्जन लॉन्च कर चुकी हैं.

सिप्ला अपने वर्जन सिप्रेम को 5,000 रुपये से कम कीमत पर देगी, जबकि हेटेरो ने रेमडेसिविर के अपने जेनरिक वर्जन कोविफोर की कीमत 5400 रुपये रखी है. गौरतलब है कि गिलियड ने पिछले हफ्ते विकसित देशों के लिए कोरोना की दवा रेमडेसिविर की कीमत 2340 डॉलर रखी थी. इस दौरान मरीज को पांच दिन की दवा दी जाती है. पांच दिन में 6 शीशी रेमडेसिविर दवा मरीज को दी जाती है जिसकी कीमत 2340 डॉलर है. गिलियड ने अमेरिकी सरकार से करार किया था कि अगले तीन महीने तक वो दवा का निर्यात नहीं करेगा बल्कि पूरी दवा अमेरिका में ही देगा.

मायलेन ने कहा है कि वो भारत में रेमडेसिविर दवा को इंजेक्टेबल सामग्री के तहत बनाएगी, इसके अलावा मायलेन 127 निम्न और मध्यम आय वाले देशों के कोरोना मरीजों तक कैसे दवा पहुंचाई जाए उसपर काम हो रहा है. गौरतलब है कि भारत में कोरोना मरीजों की संख्या 7 लाख के ऊपर हो चुकी है. हालांकि अच्छी बात ये है कि भारत में कोरोना संक्रमित मरीजों के ठीक होने का प्रतिशत बाकी दुनिया के मुकाबले ज्यादा है. दिल्ली और राजस्थान में कोरोना संक्रमित मरीजों के ठीक होने का औसत 70 फीसदी से ज्यादा है.

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