नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उर्वरक कंपनियों को डीएपी जैसे गैर-यूरिया उर्वरकों की अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) नहीं बढ़ाने का निर्देश दिया और उन्हें पुराने दाम पर ही बेचने को कहा है. वैश्विक बाजारों में वृद्धि के अनुरूप गैर-यूरिया उर्वरकों की घरेलू खुदरा कीमतों में वृद्धि के मद्देनजर बृहस्पतिवार को उच्च स्तरीय बैठक में उर्वरक कंपनियों को इस संबंध में एक निर्देश जारी किया गया. इस बीच विपक्ष ने बढ़ते दामों को लेकर सरकार हमले तेज कर दिए हैं.

उन्होंने कहा कि उर्वरक कंपनियों को जटिल उर्वरकों को पुरानी दरों पर बेचने के लिए कहा गया है. उन्होंने कहा, ‘‘किसानों को पुरानी दरों पर डीएपी, एमओपी और एनपीके जैसे पोषक तत्व (उर्वरक) मिलते रहेंगे.’’ मंत्री ने अलग से ट्वीट किया कि ‘‘किसान समुदाय के हित को प्राथमिकता देते हुए, उर्वरकों की कीमतों में कोई वृद्धि नहीं होगी’’. कच्चे माल की वैश्विक कीमतों में तेज वृद्धि के मद्देनजर, घरेलू उर्वरक कंपनियों और सहकारी समितियों ने डीएपी और अन्य उर्वरक उर्वरकों की खुदरा कीमतों में वृद्धि कर दी थी.

उदाहरण के लिए, कृभको, एमसीएफएल, जुआरी एग्रो केमिकल्स, पारादीप फॉस्फेट्स ने एक अप्रैल से डीएपी की खुदरा कीमतें 1,700 रुपये प्रति बैग तक बढ़ा दी हैं। इसी तरह, चंबल फर्टिलाइजर एंड केमिकल्स लिमिटेड (सीएफसीएल) ने डीएपी दरों को बढ़ाकर 1,600 रुपये प्रति बैग और इंडोरम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने कीमत को 1,200 रुपये प्रति बैग से बढ़ाकर 1,495 रुपये प्रति बैग कर दिया है. हालांकि, सहकारी उर्वरक संस्था, इफ्को ने डीएपी के ताजा स्टॉक पर 1,700 रुपये प्रति बैग की नई दर छापी है. इफ्को ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट किया कि यह एक अनुमानित लागत है और किसानों को बिक्री के लिए नहीं है.

इफ्को के प्रवक्ता ने कहा था कि कंपनी 1,200 रुपये प्रति बैग की पुरानी दर पर ही 11.26 लाख टन कम्पलेक्स उर्वरक का पुराना स्टॉक बेचेगी.इफ्को के सीईओ और प्रबंध निदेशक यू एस अवस्थी ने ट्वीट किया, ‘‘हमने अपनी मार्केटिंग टीम को पुरानी दरों के साथ केवल पहले से पैक की गई सामग्री को किसानों को बेचने का निर्देश दिया है. हम हमेशा ‘किसान पहले’ दृष्टिकोण के साथ कोई निर्णय लेते हैं.’’ डीएपी देश में यूरिया के बाद किसानों द्वारा व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला उर्वरक है.

गैर-यूरिया उर्वरकों जैसे कि डी-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी), मुरीट ऑफ पोटाश (एमओपी) और एनपीके की खुदरा कीमतें अनियंत्रित हैं और निर्माताओं द्वारा निर्धारित की जाती हैं. केंद्र उर्वरक कंपनियों को निश्चित सब्सिडी देता है.

कच्चे माल की वैश्विक कीमतों में तेज वृद्धि के मद्देनजर, घरेलू उर्वरक कंपनियों और सहकारी समितियों ने डीएपी और अन्य उर्वरक उर्वरकों की खुदरा कीमतों में वृद्धि की है. KRIBHCO, MCFL, ज़ुहरी एग्रो केमिकल्स, परदीप फॉस्फेट्स ने 1 अप्रैल से डीएपी की खुदरा कीमतों को प्रति बैग 1,700 रुपये तक बढ़ा दिया है. इसी तरह, चंबल फर्टिलाइज़र एंड केमिकल्स लिमिटेड (सीएफसीएल) ने डीएपी दरों को बढ़ाकर 1,600 रुपये प्रति बैग कर दिया है, और इंडोरम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड 1,200 रुपये प्रति बैग से 1,495 रुपये प्रति बैग.

सबसे बड़ा सहकारी इफको, जिसने डीएपी के ताजा स्टॉक पर 1,700 रुपये प्रति बैग की नई दर छापी थी, ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि यह एक अस्थायी लागत थी और किसानों को बिक्री के लिए नहीं थी. इसने कहा कि यह 1,200 रुपये प्रति बैग की पुरानी दर पर 11.26 लाख टन जटिल उर्वरक का पुराना स्टॉक बेचना जारी रखेगा.

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