नई दिल्ली. कोरोना लॉकडाउन के बीच रमजान का महीना आ गया. इस महीने मुस्लिम समाज के लोग रोजा यानी व्रत रखकर सच्चे दिल से खुदा की इबादत करेंगे लेकिन इस बार मस्जिदें खुली नहीं होंगी. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि आपका ईश्वर आपकी नहीं सुनेगा. आप घर पर रहकर नमाज- कुरान पढ़े, आपकी इबादत भी होगी, लॉकडाउन का नियम भी नहीं टूटेगा और साथ ही आप कोरोना जैसी महामारी से अपने परिवार और पूरे देश को सुरक्षित रख सकोगे.

दरअसल जरूरी है, नहीं होता तो सरकार कभी लॉकडाउन जैसा फैसला नहीं करती. क्योंकि इसका असर सिर्फ धार्मिक कार्यों पर नहीं पूरे देश और उसकी हालात पर है. अब ऐसे में आप खुद ही देख लीजिए, अगर आप धर्म को लोगों की जान से ऊपर रखते हैं तो शायद सब जायज हो लेकिन अगर आप पहले इंसानियत को रखते हैं तो आप हर हाल में लॉकडाउन का पालन करेंगे.

रमजान को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ही नहीं, सभी राज्यों की सरकारें चिंतित हैं. डर है कि अगर कुछ लोगों की वजह से जरा भी लॉकडाउन टूटा तो उसका हर्जाना न जाने कितने लोगों को भरना पड़े. इसी डर की वजह से सरकार की ओर से मुस्लिम समुदाय के लोगों से इस माह के दौरान नियमों का पूरी तरह पालन करने की अपील की जा रही हैं. लेकिन आप सरकार के इस डर को घर पर रहकर दूर भगा दीजिए और देशहित में हर तरह से अपना योगदान कीजिए.

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