नई दिल्लीः अयोध्या भूमि विवाद में आज यानी 13 मार्च को फिर एक बार सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट इस मामले में रोजाना सुनावाई पर भी फैसला दे सकता है. इस मामले में सारी कागजी कार्रवाई औऱ अनुवाद का काम पूरा कर लिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना रुख पहले ही साफ कर दिया है कि वो इस मामले को आस्था की नजर से नहीं बल्कि एक जमीनी विवाद के रुप में सुनवाई करेगा. इस मामले में पक्षकरों को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले को और ज्यादा नहीं टाला जाएगा.

इस मामले की आखिरी सुनवाई 1 फरवरी को हुई थी. तब महत्वपूर्ण ग्रंथों और दस्तावेजो के ट्रांसलेशन न होने की वजह से सुनवाई को टालना पड़ा था. जिसके बाद 8 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के सामने हुई मीटिंग में सभी पक्षों द्वारा कागजी कार्रवाई और जरूरी अनुवादा का काम पूरा करने की बात कही गई.

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या भूमि विवाद मामले में सभी पक्षों को दो सप्ताह का समय दिया था. जिसमें सुप्रीम कोर्ट की तरफ से साफ कर दिया गया था कि अब इस मामले में कोई नया पक्षकार नहीं जुड़ेगा. अयोध्या विवाद मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला देते हुए विवादित भूमि का 2.77 एकड़ जमीन को तीनों पक्षों के बीच बांटने का आदेश दिया था.

इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले को मामले से जुड़े तीनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. इस दौरान कई बार इस केस की सुनवाई की तारीख आती रही है लेकिन दोनों पक्षों की ओर से तकनीकी औपचारिकता पूरी नहीं हो पाने के आधार पर इसकी सुनवाई टलती गयी लेकिन अदालत के बाहर समझौता नहीं होने की वजह से अब इस मामले में बहस में तेजी आएगी.

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