जयपुर: राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच जारी सियासी घमासान के बीच सचिन पायलट गुट की ओर से दायर संशोधित याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है. पायलट खेमे ने विधानसभा से अयोग्य करार देने की कांग्रेस की मांग पर विधानसभा अध्यक्ष की ओर से भेजे गए नोटिस को हाई कोर्ट में चुनौती दी है. जाने-माने वकील हरीश साल्वे सचिन पायलट खेमे की तरफ से राजस्थान हाईकोर्ट की डिविजन बेंच में दलीलें रख रहे हैं जबकि दूसरी तरफ विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी दलीलें रख रहे हैं. हरीश साल्वे ने कोर्ट में दलील दी है कि पायलट गुट ने दल-बदल कानून का उल्लंघन नहीं किया है.

मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत मोहन्ती और जस्टिस प्रकाश गुप्ता की खंडपीठ सचिन पायलट खेमे की संशोधित याचिका पर सुनवाई कर रही है. याचिका में संविधान की 10वीं अनुसूची के आधार पर दिए गए नोटिस को चुनौती दी गई है. सचिन पायलट खेमे के वकील हरीश साल्वे ने कोर्ट में अपनी दलील में स्पीकर के आदेश पर सवाल उठाए हैं. हरीश साल्वे ने सचिन पायलट गुट का पक्ष रखते हुए कहा है कि इस मामले में दसवीं अनुसूची का उल्लंघन नहीं हुआ है. उन्होंने स्पीकर से कोर्ट रूम में बुलाने की मांग की. साल्वे ने बार बार कोर्ट रूम में दोहराया कि जब पायलट गुट ने दलबदल कानून का उल्लंघन ही नहीं किया तो फिर विधानसभा में उन्हें अयोग्य कैसे घोषित कर सकते हैं?

हरीश साल्वे ने हाई कोर्ट के सामने सचिन पायलट के पक्ष में दलील देते हुए कहा कि पार्टी को जगाना बगावत नहीं होती है. उन्होंने कहा कि विधानसभा के बाहर दल-बदल कानून का प्रावधान लागू नहीं होता है. ऐसे में स्पीकर को नोटिस देने का अधिकार नहीं है. साल्वे ने कहा कि पार्टी ग्रुप ने कोई विद्रोह नहीं किया है, वह सिर्फ अपनी बात रखने के लिए गए थे जिसके बदले उन्हें और बाकी विधायकों को अयोग्य घोषित करने का कदम उठाया जा रहा है.

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