जयपुर: जिस तरह रस्सी टूट जाने पर गांठ पड़ जाती है वैसे ही रिश्तों में भी एक बार दरार आने पर पहले जैसी बात नहीं रह जाती. केंद्रीय नेतृत्व के कहने पर अशोक गहलोत और सचिन पायलट ने हाथ तो मिला लिया लेकिन दिलों की दूरियां साफ तौर पर देखी जा सकती है. ऐसा ही कुछ आज राजस्थान विधानसभा सत्र के पहले दिन हुआ जब सचिन पायलट की कुर्सी अशोक गहलोत की कुर्सी से पीछे आखिरी पंक्ति में रखी गई. ये वही सचिन पायलट हैं जिनकी कुर्सी पहले अशोक गहलोत के बगल में रखी जाती थी लेकिन आज उन्हें पीछे धकेल दिया गया. सचिन पायलट के भाषण में भी ये मलाल साफ देखने को मिला. विधानसभा में बोलते हुए पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि ‘आज मैं सदन में आया तो देखा कि मेरी सीट पीछे रखी गई है. मैं आखिरी कतार में बैठा हूं. मैं राजस्थान से आता हूं, जो कि पाकिस्तान बॉर्डर पर है. बॉर्डर पर सबसे मजबूत सिपाही तैनात रहता है. मैं जब तक यहां बैठा हूं, सरकार सुरक्षित है.’

गौरतलब है कि आज से शुरू हुए राजस्थान के विधानसभा सत्र की शुरुआत में ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधानसभा में विश्वास मत प्रस्ताव पेश कर दिया. इससे पहले सभी विधायकों को व्हिप जारी किया गया था ताकि विपक्ष को कोई मौका ना मिले. दरअसल विपक्ष बीजेपी भी अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में थी, लेकिन अशोक गहलोत ने पहले ही चाल चल दी और पूरी ताकत के साथ विधानसभा पहुंचे.

गौरतलब है कि गुरुवार को करीब महीने भर बाद पहली बार अशोक गहलोत और उनके पूर्व डिप्टी सीएम की की मुलाकात उनके आवास पर हुई. इस मुलाकात के बाद सचिन पायलट ने ट्वीट करते हुए कहा कि वे राजस्थान की जनता के हितों में काम करने को लेकर दृढ़ संकल्पित हैं. अशोक गहलोत ने विधायक दल की बैठक में विधायकों से पिछले महीने भर में हुई बातों को भूलकर आगे बढ़ने को कहा. इसके साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि सभी विधायकों की शिकायतें दूर होंगी. बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी एकजुट है और विधानसभा में एकजुटता से मुकाबला करेगी.

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