नई दिल्ली. कांग्रेस नेता राहुल गांधी उन ट्रेड यूनियनों के समर्थन में सामने आए जिन्होंने सरकार की नीतियों के खिलाफ भारत बंद का आयोजन किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर हमला किया. राहुल गांधी ने ट्विटर पर कहा, मोदी-शाह सरकार की विरोधी लोगों, विरोधी श्रम नीतियों ने भयावह बेरोजगारी पैदा की है और मोदी के पूंजीवादी दोस्तों को उनकी बिक्री को सही ठहराने के लिए हमारे सार्वजनिक उपक्रमों को कमजोर कर रहे हैं. आज 25 करोड़ से अधिक कार्यकर्ताओं ने विरोध में भारत बंद 2020 का आह्वान किया है. मैं उन्हें सलाम करता हूं.

राहुल गांधी की टिप्पणी अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी), भारतीय व्यापार संघों (सीआईटीयू), भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस और लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (एलपीएफ) द्वारा केंद्र के विरोध में की गई राष्ट्रव्यापी हड़ताल के मद्देनजर की गई थी. ये राज्य द्वारा संचालित उपक्रमों के निजीकरण के लिए सरकार की नीतियों पर है. बता दें कि 24 घंटे के बंद का आह्वान 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने विभिन्न संघों के साथ मिलकर किया है. सीआईटीयू, आईएनटीयूसी सहित 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने मांग के 12 सूत्रीय चार्टर के साथ हड़ताल का आह्वान किया है. ट्रेड यूनियन भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) हड़ताल में हिस्सा नहीं ले रहा है.

सीआईटीयू के महासचिव तपन सेन ने कहा, हम अनुबंधित श्रमिकों के लिए समान काम के लिए समान वेतन की मांग कर रहे हैं जो समान काम करते हैं, लेकिन नियमित श्रमिकों की तुलना में आधे से भी कम वेतन पाते हैं. प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि केंद्र प्रस्तावित श्रम सुधारों को छोड़ दे. इसके अलावा, विभिन्न बैंक शाखाओं में सेवाएं प्रभावित होने की संभावना है क्योंकि बुधवार को देश भर में सैकड़ों कर्मचारियों के बैंक हड़ताल पर जाने की संभावना है. ट्रेड यूनियनों के अलावा, लेफ़्ट किसान विंग्स के बैनर तले देश भर के किसान भी हड़ताल का हिस्सा होंगे. भूमि अधिकार आंदोलन 8 और 9 जनवरी को ग्रामिण हड़ताल, रेल रोक और रोड रोक का निरीक्षण करेगा.

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