नई दिल्ली. मी टू के तहत लगे यौन शोषण के आरोपों के बाद टाटा संस कंपनी से एडवाइसर पद से हटाए गए सुहेल सेठ को लेकर एक नया खुलासा हुआ है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक 2011 में यूपीए की सरकार में 126 राफेल लड़ाकू विमान के सौदे के लिए जब दिसॉल्ट एविएशन कंपनी को चुना गया तो उस दौरान इस कंपनी ने सुहेल सेठ को ब्रांड बिल्डिंग के लिए चुना. सुहले सेठ के साथ कंपनी का जुलाई 2011 में एग्रीमेंट हुआ जिसके तहत उन्हें चार साल के लिए हायर किया गया.

खबर के मुताबिक, कंसल्टेंसी कंपनी काउंसलेज इंडिया के मैनेजिंग पार्टनर सुहेल सेठ को दसॉल्ट एविएशन कंपनी उन्हें हर माह 12 लाख रुपये इस काम के लिए पे करती थी. इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में सुहेल सेठ ने बताया कि उन्होंने यह काम 2011 से 2015 के बीच किया. उन्होंने बताया कि फ्रांस की कंपनी दिसॉल्ट ने सेठ की काउंसलेज कंपनी को ब्रांड बिल्डिंगऔर ओलिग्वी पीआर को पब्लिक रिलेशन के मामले को भारत में देखने के लिए हायर किया था.

मीडिया को बताते हुए सेठ ने कहा कि काउंसलेज इंडिया का हेड होने का फ्रांसीसी कंपनी ने उन्हें ब्रांड बिल्डिंग के लिए चुना और सीएसआर के लिए किए जाने वाले कार्यों के अलावा उनकी कंपनी एडवरटिसमेंट व अन्य ब्रांडिंग की निगरानी करते थे. उन्होंने बताया कि कंपनी के साथ उनका करार 2016 में खत्म हो गया था.

सेहुल सेठ ने सफाई देते हुए कहा कि उनका राफेल विमानों के लिए रक्षा मंत्रालय के साथ बिक्री को लेकर कोई मोल भाव करना नहीं था. इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि राफेल सौदे में मेरा रोल जीरो था. मेरा सारा ध्यान सिर्फ कंस्यूमर ब्रांड्स पर था. उन्होंने बताया कि दसॉल्ट ने उन्हें चेक के जरिए पेमेंट की जिनकी उनके पास सभी डिटेल मौजूद हैं.

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