नई दिल्ली. राफेल डील से जुड़े कई खुलासे पिछले कुछ दिनों में किए गए हैं. ये खुलासे न्यूज पेपर द हिंदू द्वारा किए जा रहे हैं. अब राफेल से जुड़ा एक और खुलासा किया गया है. द हिंदू के एडिटर एन राम की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने राफेल डील के कॉन्ट्रेक्ट पर साइन करने से कुछ दिन पहले कॉन्ट्रेक्ट में से भ्रष्टाचार विरोधी दंड और भुगतान के लिए एस्क्रो खाते की प्रमुख शर्तें हटा दी थीं. जहां एक ओर सरकार हर तरह से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के दावे कर रही है वहीं दूसरी ओर एक बड़ी और अहम डील में से भ्रष्टाचार निरोधक नियम हटाना कई सवाल खड़े कर रहा है.

द हिंदू ने पहले दावा किया था कि जहां एक ओर रक्षा मंत्रालय राफेल डील के लिए फ्रांस की कंपनी से बातचीत कर रहा था वहीं दूसरी ओर इस बारे में प्रधानमंत्री कार्यालय भी फ्रांस की कंपनी से बातचीत कर रहा था. अब कहा गया है कि 2016 में भारत और फ्रांस के बीच साइन किए गए राफेल विमान सौदे में से कुछ अहम नियमों को हटा दिया गया था. द हिंदू की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि डील साइन होने के आखिरी समय में ये बदलाव किए गए थे.

(फोटो साभार- द हिंदू)

द हिंदू की रिपोर्ट में कहा गया है कि तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की अगुवाई में डीएसी ने राफेल डील कॉन्ट्रेक्ट में आठ बदलाव किए थे. ये बदलाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में कैबिनेट कमेटी ने मंजूर किए थे. रक्षा अधिग्रहण परिषद के सदस्य-सचिव वाइस एडमिरल अजीत कुमार द्वारा हस्ताक्षरित एक नोट में दर्ज आठ बदलावों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव था कि सप्लाई प्रोटोकॉल के अंतर्गत कंपनी के अकाउंट देखने की अनुमति मिले और मानक रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीपीपी) की उन धाराओं को हटा लिया था जिनके तहत दलालों और एजेंसियों के इस्तेमाल पर दंड लगाने का प्रावधान था.

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