नई दिल्ली: New Delhi

Punjab Elections : पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद. पंजाब चुनाव Punjab Assembly Elections में सभी सीटों के मतदान एक ही फेज में पूरा कराने के लिये तय किया गया है. यहां दस मार्च को नतीजे घोषित हो जाएंगे जबकि वोटिंग 14 फरवरी यानि वैलेण्टाइन डे के दिन होगी.

ऐसे में हर किसी की निगाहें पंजाब के बदले हुए राजनीतिक समीकरण पर हैं. पिछले कुछ महीनों में बीजेपी पंजाब में अलग थलग पड़ चुकी है. ऐसी राजनीतिक विसंगति में फंसी बीजेपी नए सिरे से चुनावी रणनीति बनाने में जुट गई है.

आकाली से नाता टूटने के बाद बीजेपी ने नई चुनावी पृष्ठभूमि तैयार की है. जहां पिछले चुनाव में बीजेपी ने अकाली दल के साथ गठबंधन करते हुए कम सीटों पर चुनाव लड़ा था तो वहीं अब पूरे पंजाब में चुनाव लड़ने का आगाज किया है.

गौरतलब है कि पंजाब लोक पार्टी के प्रमुख कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सुखदेव सिंह ढ़ींढ़सा की शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन करने का फैसला किया है. जिसका मौका भुनाने में बीजेपी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगी.

बीजेपी के मुद्दे

पंजाब के चुनाव Punjab Elections में पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक का मुद्दा इस बार अहम हो सकता है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि बीजेपी इस मुद्दे को पंजाब में बड़े जोर शोर से उठाएगी. बीजेपी के नेता कांग्रेस पर प्रधानमंत्री की सुरक्षा से समझौते का आरोप लगाते हुए. खालिस्तानी ग्रुपों से विरोध की बात करते हुए. हिन्दू वोटरों को साधने की कोशिश करेंगे. वहीं जानकारों का मानना है कि बीजेपी के इस दांव से हिन्दू वोटर उसके साथ आ सकते हैं.

आन्तरिक कलह पर जोर

एक तरफ कैप्टन अमरिंदर सिंह राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर पाकिस्तान का मुद्दा बार-बार उठाते रहे हैं. और सिद्धू के पाकिस्तान जाने पर बड़ा बखेड़ा भी खड़ा किया था. तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी सिद्धू और चरणजीत सिंह चन्नी के बीच अन्तर्कलह का मुद्दा उठाकर जनता के बीच जाएगी.  

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