नई दिल्ली: एक तरफ जहां कोरोना की वजह से लोगों की जान जा रही है वहीं दूसरी तरफ कुछ प्राइवेट इसे कमाने का मौका मानकर जमकर चांदी काट रहे हैं. अस्पताल में बेड होने के बावजूद आम लोगों को मना कर दिया जाता है कि बेड खाली नहीं है लेकिन आप मोटी रकम देने को तैयार हैं तो आपको बेड मिल जाएगा. इस सच को उजागर करने के लिए इंडिया न्यूज की टीम ने कई अस्पतालों से बात की और जाना कैसे कोरोना मरीजों को हजारों में बैड दिए जा रहे हैं.

दिल्ली सरकार के कोरोना एप पर गंगाराम अस्पताल में 20 बैड खाली दिखाई दिए लेकिन जब हमारे संवाददाता ने गंगाराम अस्पताल में कोरोना पेशेंट को भर्ती कराने के लिए फोन किया तो पहले काफी देर तक घंटी जाती रही. कई बार कॉल करने के बाद गंगाराम अस्पताल में फोन उठाया गया और कहा गया कि बेड खाली नहीं है. जब हमारे संवाददाता ने एप्लिकेशन पर बेड उपलब्ध होने की बात कही तो अलॉटमेंट की पेचीदगियां समझाई जाने लगीं.

यही हाल दिल्ली से सटे गुरुग्राम का है जहां मेदांता और आर्टिमिस हॉस्पिटल से बात करके ये पता लगाने की कोशिश की गई कि अगर आप इन अस्पतालों में मरीज का दाखिला करते हैं तो आपको कितने पैसे खर्च करने होंगे. आपको जानकर हैरानी होगी कि मेदांता अस्पताल में होम आइसोलेशन का खर्च ही 4900 से 21900 का है. मतलब आप घर पर ही रहेंगे सिर्फ डॉक्टर आपको देख जाएंगे, उसी का खर्च इतना पड़ेगा. अब सोचिए कि घर पर रहने के 22 हजार लग रहे हैं तो अस्पताल में भर्ती होने के कितने लगेंगे? 

गुरुग्राम के ही आर्टिमिस हॉस्पिटल में फोन करने पर पहले तो वहां के स्टॉफ ने कहा कि बेड मिल जाएगा आप पेशेंट को ले आएं लेकिन जब उनसे फीस के बारे में बात होने लगी तो उन्होंने कॉल ट्रॉन्सफर कर दिया और दूसरे शख्स ने मना कर दिया कि हमारे पास बेड है ही नहीं.

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