श्रीनगर. एक दिन बाद राष्ट्रपति द्वारा जम्मू-कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी गठबंधन वाली महबूबा मुफ्ती सरकार गिरने के बाद गवर्नर शासन को स्वीकृति मिल चुकी है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जम्मू कश्मीर में एन एन वोहरा की रिपोर्ट के बाद बुधवार को राज्यपाल शासन लगा दिया है. बता दें संवैधानिक कारणों की वजह से जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन नहीं बल्कि राज्यपाल शासन लगाया जाता है इससे पहले भी कई बार लगाया जा चुका है. संविधान की धारा 92 के तहत अगर राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल होता है तो ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति की मंजूरी से 6 महीने के लिए राज्यपाल शासन लगाया जाता है.

मंगलवार को अचानक भारतीय जनता पार्टी ने घोषणा कर पीडीपी से समर्थन वापस लेने वाली सूचना से सभी को चौंका दिया. मीडिया रिपोर्ट्स व जानकारों की मानें तो बीजेपी पीडीपी में सीजफायर पर मतभेद की खबरें तो जरूर थी लेकिन बीजेपी समर्थन वापस लेगी ऐसी भनक पीडीपी को नहीं थी. इस सियासी घमासान के बाद बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्यपाल शासन को मंजूरी दे दी. बता दें जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन नहीं बल्कि राज्यपाल शासन लागू होता है. देश में केवल जम्मू कश्मीर ही ऐसा राज्य है जहां ये नियम है. भारत का संविधान जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देता है जिसके जरिए उसके पास अलग संविधान और नियम हैं.

मंगलवार को सियासी उठापठक के बाद जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एनएन वोहरा ने चिट्ठी लिखकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से राज्य में राज्यपाल शासन लगाने की सिफारिश कर दी है. जिसके बाद राष्ट्रपति की ओर से स्वीकृति आ गई है. जम्मू कश्मीर में अगर 6 महीने के भीतर संवैधानिक तंत्र दोबारा बहाल नहीं होता तो भारतीय संविधान की धारा 356 के तहत वहां राष्ट्रपति शासन लागू हो जाता है.

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