नई दिल्ली: देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का निधन हो गया है. प्रणब मुखर्जी के बेटे अभिजीत मुखर्जी ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी है. रविवार से उनकी हालत में और भी ज्यादा गिरावट देखने को मिली है. ब्रेन सर्जरी के बाद से प्रणब मुखर्जी की हालत लगातार नाजुक बनी हुई थी. आर्मी हॉस्पिटल से जारी प्रणब मुखर्जी की हेल्थ बुलेटिन में कहा गया था कि प्रणब मुखर्जी को फेफड़ों में सक्रमण की वजह से सेप्टिक शॉक आ रहे हैं और वो डीप कोमा में हैं. डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा हुआ है.

84 साल के प्रणब मुखर्जी 10 अगस्त को आर्मी रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे जहां उनके दिमाग की सर्जरी कर क्लॉट निकाला गया था. इस दौरान उनका कोरोना टेस्ट भी किया गया था जो पॉजीटिव आया था. प्रणब मुखर्जी की सेहत पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार नजर बनाए हुए है. प्रणब मुखर्जी फेफड़ों और किडनी में भी संक्रमण है जिसकी वजह से वो रिकवर नहीं कर पा रहे हैं.

कोरोना पॉजीटिव आने के बाद प्रणब मुखर्जी ने ट्वीट कर कहा था कि एक अलग बीमारी के इलाज के लिए हॉस्पिटल जाने के बाद मुझे पता चला है कि मैं कोरोना संक्रमित हो गया हूं. मैं उन सभी लोगों से अनुरोध करता हूं जो पिछले हफ्ते मेरे संपर्क में आए हैं वो खुद को आइसोलेट कर खुद का कोरोना टेस्ट करवा लें. 

Pranab Mukherjee Health Update:

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प्रणब दा ने पश्चिम बंगाल से ही राजनीति शाष्त्र और इतिहास विषय में एम.ए. किया.

प्रणब दा ने पश्चिम बंगाल से ही राजनीति शाष्त्र और इतिहास विषय में एम.ए. किया. उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से एल.एल.बी. की डिग्री भी हासिल की. वे 1969 से पांच बार राज्य सभा के लिए चुए गए. 2004 से लगातार दो बार लोक सभा के लिए चुने गए. 1973 में वे केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कर लिए गए. 1975,1981,1993,1999 में फिर राज्यसभा के लिए चुने गए

श्री प्रणब मुखर्जी के स्वर्गवास के बारे में सुनकर हृदय को आघात पहुंचा- राष्ट्रपति कोविंद

पूर्व राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी के स्वर्गवास के बारे में सुनकर हृदय को आघात पहुंचा। उनका देहावसान एक युग की समाप्ति है। श्री प्रणब मुखर्जी के परिवार, मित्र-जनों और सभी देशवासियों के प्रति मैं गहन शोक-संवेदना व्यक्त करता हूँ।

सार्वजनिक जीवन में विराट कद हासिल करने वाले प्रणब दा ने भारत माता की सेवा एक संत की तरह की। देश के एक विलक्षण सपूत के चले जाने से समूचा राष्ट्र शोकाकुल है

असाधारण विवेक के धनी, भारत रत्न श्री मुखर्जी के व्यक्तित्व में परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम था। 5 दशक के अपने शानदार सार्वजनिक जीवन में, अनेक उच्च पदों पर आसीन रहते हुए भी वे सदैव जमीन से जुड़े रहे। अपने सौम्य और मिलनसार स्वभाव के कारण राजनीतिक क्षेत्र में वे सर्वप्रिय थे।

भारत के प्रथम नागरिक के रूप में, उन्होंने लोगों के साथ जुड़ने और राष्ट्रपति भवन से लोगों की निकटता बढ़ाने के सजग प्रयास किए। उन्होंने राष्ट्रपति भवन के द्वार जनता के लिए खोल दिए। राष्ट्रपति के लिए 'महामहिम' शब्द का प्रचलन समाप्त करने का उनका निर्णय ऐतिहासिक है।
- राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

अभिजीत मुखर्जी ने ट्वीट कर दी प्रणब दा के निधन की जानकारी

प्रणब मुखर्जी के बेटे अभिजीत मुखर्जी ने उनके निधन की खबर ट्वीट करके दी. प्रणब मुख़र्जी का जन्म 11 दिसम्बर 1935 में पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में हुआ था.

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