नई दिल्लीः पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले के एक आरोपी मेहुल चोकसी की गिरफ्तारी को लेकर भारत को एंटीगुआ से करारा झटका लगा है. एंटीगुआ सरकार ने भारत सरकार की तीनों मांगों को खारिज कर दिया है. देश छोड़कर फरार हो चुका आरोपी मेहुल चोकसी एंटीगुआ की नागरिकता ले चुका है और एंटीगुआ ने मेहुल चोकसी को गिरफ्तार करने और भारत भेजने से साफ इनकार कर दिया है. यानी साफ हो गया है कि पीएनबी घोटाले के आरोपियों को भारत लाने के लिए अभी जांच एजेंसियों को और पसीना बहाना होगा.

भारत ने मेहुल चोकसी मामले में एंटीगुआ सरकार के समक्ष तीन मांगें रखी थीं. यह तीन मांगें थीं- मेहुल चोकसी को गिरफ्तार करना, उसका प्रत्यर्पण करना और उसका पासपोर्ट रद्द करना. एंटीगुआ सरकार ने भारत की इन तीनों ही मांगों को खारिज कर दिया है. एंटीगुआ सरकार का कहना है कि मेहुल चोकसी को नियमों के मुताबिक नागरिकता दी गई है. हमारे देश का संविधान मेहुल की हिफाजत करता है. ऐसे में सरकार मेहुल को ना ही गिरफ्तार कर सकती है, ना ही उसका पासपोर्ट रद्द कर सकती है और ना ही उसका प्रत्यर्पण कर सकती है.

मेहुल चोकसी को नागरिकता देने के संबंध में एंटीगुआ सरकार ने तर्क दिया कि जिस समय मेहुल को नागरिकता देने की कवायद चल रही थी उस समय भारत सरकार से पूछा गया था कि क्या मेहुल के खिलाफ कोई चार्ज पेंडिंग है लेकिन भारत की ओर से इस पर कोई जवाब नहीं दिया गया. मेहुल को सरकार की ओर से क्लीन चिट मिली थी. जिसके बाद मेहुल को एंटीगुआ की नागरिकता दे दी गई. मेहुल के खिलाफ अभी तक कोई रेड कॉर्नर नोटिस जारी नहीं किया गया है.

बता दें कि एंटीगुआ सरकार ने अब सारा दोष भारत पर मढ़ते हुए कहा है कि भारत सरकार अब इस मामले में सबूत दे कि जिस समय मेहुल चोकसी को एंटीगुआ की नागरिकता दी जा रही थी उस समय क्या भारत में मेहुल के खिलाफ कोई मामला दर्ज था या उसके खिलाफ कोई जांच चल रही थी. गौरतलब है कि हीरा कारोबारी निरव मोदी और मेहुल चोकसी पीएनबी में करीब 13500 करोड़ रुपए घोटाले के आरोपी हैं और दोनों ही इस समय देश छोड़कर भाग चुके हैं. 

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