नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार इंटरव्यू देकर सभी मुद्दों पर अपनी सरकार का स्टैंड क्लियर करते नजर आ रहे हैं. पीएम मोदी ने हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में विदेश नीति, घरेलू मुद्दों, मॉब लिंचिंग, आरक्षण, वुमन इंपॉवरमेंट आदि मुद्दों पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि बीते चार साल में भारत और चीन बॉर्डर पर तनाव जरूर रहा है लेकिन दोनों ही देशों की तरफ से एक भी गोली नहीं चली. डोकलाम मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भूटान सीमा पर विवाद पिछले साल ही सुलझाया जा चुका है.

चीन के साथ संबंधों पर पीएम मोदी ने कहा कि मेरी शी जिनपिंग के साथ चार साल में कई बार मुलाकात हुई है. हमने मामले को आपसी बातचीत से सुलझाने पर बल दिया है. मेरी सरकार की विदेश नीति ने अपने केंद्र में देश के विकास, भारतीयों के कल्याण और दुनिया में साझा प्रगति और समृद्धि को रखा है. इसके साथ ही उन्होंने बैंकों का एनपीए बढ़ने पर भी खुलकर बात की. एनपीए के मुद्दे पर पीएम मोदी ने कहा कि यूपीए के दूसरे कार्यकाल में भारी लोन दिए गए. इसे टेलिफोन बैंकिंग कहा जाता है जो कि पिछली सरकार की विशेषता थी. टेलिफोनिक निर्देशों में सीधे बैंकों को ऋण देने के लिए कहा गया. ज्यादातर मामलों में बिना किसी जांच के ही लोन दे दिये गए. हमने आकर काफी सुधार किया है.

पीएम मोदी ने बेरोजगारी के मुद्दे पर भी जवाब दिया. उन्होंने कहा कि 2017 से अप्रैल 2018 के बीच 45 लाख औपचारिक रोजगार पैदा हुए हैं. पर्यटन में विकास, मुद्रा योजना के तहत लोन, स्टार्टअप और कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए. ईपीएफओ के आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल 70 लाख नए रोजगार पैदा हुए हैं. पीएम ने कहा कि 2014 में मोबाइल निर्माण के दो उद्योग थे लेकिन अब इनकी संख्या 120 हो गई है. क्या इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में इस विकास से रोजगार पैदा नहीं हुए? उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष पर्यटकों की संख्या में 14 प्रतिशत वृद्धि देखने को मिली है तो क्या इससे रोजगार पैदा नहीं हुए होंगे?

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