नई दिल्ली. संसद का शीतकालीन सत्र 18 नवंबर से शुरू होने जा रहा है. लोकसभा और राज्यसभा का शीतकालीन सत्र 18 नवंबर से 13 दिसंबर 2019 तक चलेगा. यह सत्र नरेंद्र मोदी सरकार के साथ ही विपक्ष के लिए भी काफी अहम माना जा रहा है. विपक्ष जहां आर्थिक मंदी के मुद्दे पर केंद्र सरकार को संसद के अंदर घेरने का इंतजार कर रहा है. वहीं बीजेपी सरकार आयकर अधिनियम 1961 और वित्त अधिनियम 2019 पर आए अध्यादेश को कानून का रूप देने पर जोर देगी.

संसदीय कार्य मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बताया कि इस साल संसद का शीतकालीन सत्र 18 नवंबर से 13 दिसंबर तक चलेगा. पिछले दो सालों से शीतकालीन सत्र 21 नवंबर से शुरू होकर जनवरी के पहले सप्ताह में खत्म होता आ रहा है. हालांकि इसकी अवधि इस साल कम की गई है.

संसद के शीतकालीन सत्र में दो महत्वपूर्ण अध्यादेश को कानून का रूप दिया जाएगा. सितंबर महीने में आर्थिक मंदी से निपटने के लिए मोदी सरकार ने कॉर्पोरेट टैक्स की दर में कमी का फैसला लिया गया था. अब इनकम टैक्स एक्ट और फाइनेंस एक्ट में संशोधन कर इसे कानूनी अमलीजामा पहनाया जाएगा.

इसके अलावा सितंबर महीने में ही मोदी सरकार ने ई सिगरेट की खरीद, बिक्री और उपभोग पर रोक लगाने के लिए अध्यादेश जारी किया था. इसे भी संसद के अंदर कानूनी रूप दिया जाएगा. इसके अलावा शीतकालीन सत्र में अन्य कुछ बिल पर भी बहस होगी.

दूसरी ओर विपक्ष भी बेसब्री से शीतकालीन सत्र का इंतजार कर रहा है. इस महीने के अंत में ही झारखंड में विधानसभा चुनाव भी शुरू होने जा रहे हैं. इसलिए यह सत्र कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियों के लिए खास है. कांग्रेस ने आर्थिक मंदी और अन्य मुद्दों पर नरेंद्र मोदी सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है.

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